चालीस फीसदी महिलाएं अत्याचार की शिकार : पांचाल

Banda Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
बांदा। वर्ष भर पूर्व अतर्रा में शिक्षामित्र विमला वर्मा द्वारा अपने पांच बच्चों के साथ की गई आत्महत्या की पहली बरसी पर मानवाधिकार इकाई वनांगना ने गोष्ठी आयोजित की। इसमें देश के विभिन्न संगठनों से जुड़ी महिलाओं ने महिला हिंसा पर अपने नजरिए पेश किए। स्थानीय पुलिस अधिकारी भी गोष्ठी में शामिल हुए।
सोमवार को यहां शहनाई पैलेस में लगभग पूरा दिन चली गोष्ठी में पुलिस द्वारा घरेलू हिंसा का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। महिला संगठनों से जुड़ीं महिलाओं ने कहा कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएंगे तो न्याय कहां से मिलेगा। टाटा इंस्टीट्यूट मुंबई से आईं सहायक प्रोफेसर सुश्री तृप्ती पांचाल ने कहा कि 10 में से 4 महिलाएं हिंसा का शिकार होती है। यह बात देश के आंकड़े बताते हैं। उन्होंने अतर्रा की विमला का हवाला देकर कहा कि हम भी विमला हो सकते हैं। विमला पुलिस कर्मी की पत्नी होने के बाद भी हिंसा का शिकार बनी। उन्होंने कहा कि पुलिस अपने कर्मचारी को प्रोटेक्ट करती है। महिला किसी भी स्तर पर हो उसके साथ अत्याचार होता ही है।
राइट टू फूड में सुप्रीम कोर्ट की सलाहकार सुश्री अरुंधति ने कहा कि पुलिस की सत्ता दोहरी होती है। पुलिस से खिलाफ महिला आवाज नहीं उठा सकती। अगर वह कोशिश करती है तो उसे पुलिस व्यवस्था से लोहा लेना पड़ता है। जिस महिला की ससुराल में पुलिस कर्मी मौजूद हों, वहां महिला को खामोशी से हिंसा सहना पड़ती है। वह जानती है कि पुलिस में शिकायत करने का कोई मतलब नहीं। आखिर वह शिकायत लेकर जाए तो जाए कहां? नई दिल्ली से आईं सुश्री पूर्णिमा निरंतर ने कहा कि महिलाओं के सामने पुलिस और घरेलू हिंसा की सख्त चुनौती है। घरेलू हिंसा को समाज आज भी अपराध की श्रेणी में नहीं लाता। लोग सुलह करा देते हैं। महिला कोई कदम उठा दे तो उसे अपराधी या डायन बता दिया जाता है। वनांगना नेतृत्व समूह की अवधेश ने अतर्रा के विमला मामले को विस्तृत रूप से बताया।
पुलिस अधीक्षक ज्ञानेश्वर तिवारी ने महिला हिंसा के प्रति अपना नजरिया और पुलिस कार्रवाइयों को बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मी को कहीं भी हिंसक नहीं होना चाहिए। घर हो या बाहर। गोष्ठी को अपर पुलिस अधीक्षक स्वामी प्रसाद ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर पुलिस अधिकारियों को वनांगना व अन्य महिला संगठनों ने संयुक्त रूप से नौ सूत्री मांगपत्र सौंपा। इसमें कहा गया कि महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा को घरेलू मामला नहीं समझना चाहिए। अन्य राज्यों की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी महिलाओं के लिए विशेष इकाई/सेल गठित होना चाहिए। गोष्ठी में वनांगना की शबीना मुमताज, पुष्पा आदि शामिल रहीं। गोष्ठी के बाद शाम को महिला संगठन ने अतर्रा में विमला वर्मा की याद में कैंडिल जुलूस निकाला। यह विमला के ससुराल से शुरू होकर थाने में समाप्त हुआ।

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