बालू खदानें लेने में दिल्ली की कंपनी का 9.64 करोड़ जब्त

अमर उजाला ब्यूरो/बांदा Updated Mon, 04 Dec 2017 11:12 PM IST
बांदा। ‘लाल सोना’ यानी बालू की खदानें पट्टे पर लेकर अंधी कमाई का सब्जबाग देख रही दिल्ली की कंपनी को तगड़ी चपत लगी है। नीलामी पर चार खदानें लेने के बाद निर्धारित समय के अंदर पूरी धनराशि जमा न करने पर प्रशासन ने कंपनी द्वारा जमा 9 करोड़ 64 लाख रुपया जब्त कर लिया है। सितंबर में ई-टेंडर के जरिये बांदा जिले की केन और यमुना नदियों की 32 खदानों की नीलामी हुई थी। 12 अक्तूबर को टेंडर खोले गए थे। 32 में सिर्फ 14 खदानों पर ही टेंडर पड़े। 18 खदानों में टेंडर नहीं आए। नीलाम हुई 14 खदानों में पैलानी की साड़ी खादर (केन नदी) खदान और अमलोर की दो खदानें नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-2 निवासी अमन सेठी ने क्रमश: 725 और 711 रुपये प्रति घन मीटर रॉयल्टी की दर से ले ली। यह सर्वाधिक बोली थी।  साड़ी खादर खदान की एक साल की रॉयल्टी 150 रुपये प्रति घनमीटर की दर से 13 करोड़ 80 लाख रुपये हुई। इसका 25 प्रतिशत 3 करोड़ 45 लाख नीलामी के समय तत्काल जमा करा लिया गया। इसी तरह अमलोर खदान संख्या-11 में 7 करोड़ 58 लाख 70 हजार रुपये रॉयल्टी होती थी। इसका 25 प्रतिशत एक करोड़ 89 लाख 67 हजार रुपये जमा कराया गया। अमलोर की खदान संख्या-12 में 7 करोड़ 58 लाख 70 हजार कुल रॉयल्टी का 25 प्रतिशत एक करोड़ 89 लाख 67 हजार 500 रुपये नीलामी के समय ही जमा करा लिया गया। इसी तरह  नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-2 निवासी पराग सेठी ने नरैनी क्षेत्र के निहालपुर स्योढ़ा गांव की खदान संख्या-15 ली। इसकी कुल सालाना रॉयल्टी 9 करोड़ 60 लाख का 25 फीसदी 2  करोड़ 40 लाख जमा कराया गया। नीलामी के बाद शेष पैसा दो दिनों के अंदर जमा करने की शर्त थी। लेकिन कंपनी संचालकों ने चारों खदानों का शेष पैसा जमा नहीं किया। इस पर खनिज विभाग ने चारों खदानों की जमा 25 फीसदी रकम लगभग 9.64 करोड़ रुपये सरकार के पक्ष में जब्त कर ली है। जिला खनिज अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने बताया कि कंपनी ने न पैसा जमा किया, न जरूरी अभिलेख। उन्होंने बताया कि संबंधित फर्म को जमानत राशि जब्त कर लिए जाने संबंधी रजिस्टर्ड डाक से पत्र भेजकर दी गई है। साथ ही शासन को भी अवगत कराया गया है।
 
 लमेहटा और कुल्लू खेड़ा सहित इस माह बंद होंगी 4 खदानें
बांदा (ब्यूरो)। मार्च माह से शुरू हुई जिले की बालू खदानों का अब समय पूरा होने लगा है। छह माह के लिए ई-पट्टे पर खदानों के ठेके दिए गए थे। सोमवार (4 दिसंबर) को लमेहटा और कुल्लू खेड़ा खदानों का समय समाप्त हो गया। 12 दिसंबर को हटेटी पुरवा प्रथम में भी खनन की अवधि खत्म हो जाएगी। खप्टिहा कलां-प्रथम खदान 20 दिसंबर को समय पूरा हो जाने पर बंद हो जाएगी। उधर, जनवरी और फरवरी 2018 में तीन अन्य खदानें भी बंद हो जाएंगी। खप्टिहा कलां द्वितीय और चंदौर (अतर्रा) का समय अगले माह जनवरी में खत्म हो जाएगा। सिंधन कलां खदान फरवरी में बंद होगी।

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