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आज भी आधा दर्जन मकानें गंगा में हुई समाहित, गंगा में बढ़ाव जारी

Varanasi Bureauवाराणसी ब्यूरो Updated Thu, 19 Sep 2019 10:30 PM IST
रामगढ़। दुबे छपरा में बाढ़ क्षेत्र का निरीक्षण करते जिलाधिकारी व अन्य प्राशासनिक अधिकारी
रामगढ़। दुबे छपरा में बाढ़ क्षेत्र का निरीक्षण करते जिलाधिकारी व अन्य प्राशासनिक अधिकारी - फोटो : BALLIA
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रामगढ़। दुबे छपरा बंधा को निगलने के बाद गंगा की उफ़नती लहरों ने बाढ़ से घिरे उदई छपरा में गुरुवार को जमकर कहर बरपाई। जिसके चलते आधा दर्जन लोगों के मकान की जल समाधि हो गई। मकानों के नदी में गिरने के साथ ही गांवो में खलबली मच गई। नावों के अभाव में पीड़ित लाचार दिखे। किसी तरह लोगों ने जान बचाया। केंद्रीय जल आयोग गाय घाट के अनुसार गुरुवार को गंगा का जलस्तर 59.510 मी. दर्ज किया गया साथ ही प्रति घंटा एक सेमी का बढ़ाव बना हुआ है।
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बुधवार की रात में उदई छपरा निवासी प्रेम उपाध्याय, भरत उपाध्याय, शत्रुघ्न उपाध्याय, बैजनाथ, भुअर कोहार, टूक टूक राम, परशन सिंह का मकान गंगा की गोद में समा गया। गंगा नदी के उग्र तेवर को देखते हुए दुबेछपरा, गोपालपुर, उदई छपरा के लोग अपने घरों को खाली करना शुरू कर दिए। गुरुवार को दुबेछपरा में पहुंचे जिलाधिकारी से पीड़ितों ने तहसील प्रशाशन की ओर से अब तक नाव न मिलने की शिकायत की। जिसपर डीएम ने लेखपाल, ग्राम प्रधान व बांसडीह तहसीलदार गुलाब चंद्रा को तुरंत नाव व सहायता राशि बंटवाने का निर्देश दिया। डीएम ने कहा कि दो घंटे के अंदर सूची बनाकर सहायता राशि बंट जानी चाहिए। नहीं बटा तो किसी की खैर नहीं। डीएम ने पीड़ितों हर सहायता देने का आश्वासन दिया।
डीएम ने बाढ पीड़ितों से मिल जानी समस्याएं : रामगढ़। जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत ने गुरुवार को दूबेछपरा एनएच की पटरियों पर शरण लिये कटान पीड़ितों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होने राहत शिविरों से लगायत विभिन्न विभागों द्वारा उपल्ब्ध करायी गई सुविधाओ को लेकर उदासीन बने अधिकारियों की जमकर क्लास ली। सुघरछपरा मोड़ के पास एक प्राइवेट स्कूल में बने राहत शिविर में पिछले तीन दिनों से आई राहत सामग्री को अबतक वितरण न किये जाने पर बैरिया एसडीएम व तहसीलदार से कारण पूछा और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए तहसीलदार बांसडीह गुलाब चंद्रा को मौके पर बुलाकर कैंप कर पीड़ितों को राहत सामग्री वितरण करने के अलावा अन्य समस्याओं के समाधान का निर्देश दिया।
गुरुवार को दूबेछपरा कटान पीड़ितों के बीच पंहुचे डीएम का तेवर काफी तल्ख दिखा। अधिकारी का काफिला सबसे पहले सुघरछपरा मोड़ स्थित राहत शिविर पर पंहुचा। यहां पर जिम्मेदारों की उदासीनता का आलम यह था कि पीड़ितों के लिये दो दिन पहले से आयी राहत सामग्री का वितरण करना तो दूर ट्रकों से उतारी भी नहीं गयी थी। अधिकारी ने मौके पर एसडीएम बैरिया दुष्यंत कुमार व तहसीलदार श्रवण कुमार को मौके पर बुलाकर अबतक वितरण न किये जाने का कारण पूछा। माकूल जबाव न देने चेताया कि अब तक वितरण न किये जाने का सही कारण बताएं या सस्पेंड हो जाएं। इसके बाद डीएम का काफिला रिंग बंधे पर अब भी हो रहे कटान का निरीक्षण कर बचाव कार्य को लेकर बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता को निर्देश दिया। डीएम ने कटान पीड़ितों से मिल कर उनकी समस्याओं को जाना।
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कई गांवों का बदल चुका है इतिहास व भूगोल
रामगढ़। पिछले तीन दशकों से गंगा नदी ने एनएच 31 के दक्षिण दिशा में बसे करीब दो दर्जन गांवों का अस्तित्व मिटा दिया। जिसके चलते द्वाबा का इतिहास व भूगोल सिकुड़ने लगा और कई लोग आज भी एनएच 31 पर रामगढ़ से सुघर छपरा तक पटरी पर या रिश्तेदारों के यहां गुजर बसर करने को विवश हैं। अब तक के आंकड़ों पर गौर करे तो गंगा की लहरों ने वर्ष 1996 में मझौवा की 8000 की आबादी, वर्ष 1997 में पचरुखिया 4000 की आबादी, 1998 में नरायनपुर की 1000 की आबादी, 1996 में हुकुम छपरा की 500 आबादी, 1997 में उपाध्याय टोला की 300 आबादी, 1999 में तेलिया टोला व मीनापुर की एक हजार की आबादी, 2003 में दुर्जनपुर की 800 की आबादी, 2000 में परमेश्वरपुर की 200 की आबादी बेघर हो गई। इसके अलावा वर्ष 2003 से 2007 तक गंगापुर की चार हजार की आबादी, 2003 से 2005 तकव् शाहपुर की 500 की आबादी, 2005 से 2008 तक रिकनी छारा की 800 की आबादी, 2016 में चौबेछपरा की 600 की आबादी, 2011 में गंगौली की 2000 की आबादी, 2016 में प्रेम नगर बकसी व श्रीनगर की 3000 की आबादी तथा 2019 में केहरपुर 400 की आबादी घर से बेघर हो गए। जिसमें अधिकतर लोग अपना आशियाना बंधे के उत्तर दिशा में बना लिये हैं तो कुछ को शासन स्तर से जमीन क्रय कर बसाया गया है। इसके अलावा कुछ लोग आज भी एनएच 31 पर या रिस्तेदारो के यहां शरण लिए हुए हैं। यहीं नहीं गंगा के कहर से सैकड़ो किसान भूमिहीन हो गए।
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लहरों के बीच फंसे लोगों के लिए संकटमोचक बनी एनडीआरएफ की टीम
रामगढ़। 11 वीं वाहिनी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की दो टीमें छह नावों और 50 बचाव कर्मियों के साथ दुबे छपरा में बाढ़ आपदा राहत बचाव कार्य में तैनात हैं। टीमों के साथ गोताखोर, पैरामेडिक्स टेकनीशियन के अलावा डीप डाइविंग से , लाइफ ब्वॉय, लाइफ जैकेट व अन्य बचाव उपकरणों के साथ बाढ़ राहत बचाव कार्य में लगातार जुटी हुई है। बुधवार की रात उप जिलाधिकारी बैरिया द्वारा ग्राम- मुरली छपरा में गंगा नदी के बीच बने टापू पर शिवजी 42, जीतन शाह 46, राजमंगल वर्मा 39, उर्मिला देवी 37साल के फंसे होने की सूचना दी गई। टीम ने बिना समय गंवाए रात 12 बजे घटनास्थल पर पहुंचकर अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए उन्हें बाहर निकाल कर सही सलामत सुरक्षित उनके परिवार वालों को सौंप दिया। टीम में कार्मिक निरीक्षक गोपी गुप्ता, उपनिरीक्षक विक्रम सिंह, सहायक उपनिरीक्षक सभाचंद यादव, बृजेश कुमार राम, जनक चौरसिया, सोनू यादव, सत्य प्रकाश, देव यादव व अन्य कार्मिक रहे।
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