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कताई मिल बंद होने से 15 सौ श्रमिक बेकार

Ballia Updated Sat, 29 Dec 2012 05:30 AM IST
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रसड़ा। जिले की एकमात्र कताई मिल के बंद हो जाने से हजारों श्रमिक बेकार हो गए हैं। श्रमिक बकाया वेतन आदि मांगों के लिए आंदोलित हैं। मिल प्रशासन की उदासीन नीतियों का खामियाजा हजारों श्रमिकों को भुगतना पड़ रहा है। हैरत कि बात यह है कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ उनकी आवाज नहीं बन रहे हैं। भुखमरी की कगार पर पहुंच चुके श्रमिक यह आस लगाए बैठे हैं कि आने वाले दिनों में कोई तो उनकी लड़ाई लड़ेगा और वाजिब हक दिलाएगा।
कताई मिल की स्थापना कांग्रेस के शासन काल में 90 एकड़ भूमि पर 23 करोड़ की लागत से 10 अगस्त 1986 को तत्कालीन कांग्रेस के मुख्यमंत्री नारायणदत तिवारी द्वारा की गई थी। मिल के चालू होने से 1500 लोगों को रोजी-रोटी मिली थी, लेकिन प्रबंधतंत्र शुरुआती दौर से ही तमाम अनियमितताओं में लिप्त रहा। जिसकी शिकायत किए जाने पर प्रबंधतंत्र बिना किसी नियम-कानून के ही मिल बंदी की घोषणा मार्च 1999 में कर दी। 12 वर्षों सें बंद पड़ी मिल, जिसकी सुध न तो प्रदेश सरकार ने ली और न ही केंद्र सरकार ने। 2012 विधानसभा चुनाव में इस बंद पड़े कताई मिल को चालू कराने के लिए दावे तो किए गए लेकिन चुनाव बाद इसकी पहल करना प्रदेश सरकार ने मुनासिब नहीं समझा। कुछ औपचारिकताएं पूरी करते हुए संस्थान ने 1500 मजदूरों में 300 मजदूरों की छंटनी कर और मामूली मुआवजा देकर सेवामुक्त कर दिया। मजदूर संघ द्वारा की गई एफआईआर में कहा गया है कि जब तक मिल श्रमिकों के पूरा देयों का भुगतान नहीं कर दिया जाता तब तक मिल बंदी और मिल बेचने का काम नहीं दिया जा सकता। मिल श्रमिक बोनस फंड स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के तहत बढ़ोत्तरी आदि मांगों के साथ-साथ मिल में प्रबंधतंत्र के घोटालों की जांच सीबीआई से कराने के लिए श्रमिक वर्षों से आंदोलनरत हैं। मिल बंद होने से 1500 श्रमिकों के परिवारों के समक्ष भुखमरी की नौबत पैदा हो गई है।

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