सद्गुरु की महिमा अपरंपार: मौनी बाबा

Ballia Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
बिल्थरारोड। सद्गुरु के सिंहासन के चारों पैर अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष से सुशोभित रहते हैं और उसकी महिमा अपरंपार है। उसके सान्निध्य से अलौकिक सुख की अनुभूति होती है। यह कहना है परिवार्जकाचार्य स्वामी श्री ईश्वर दास ब्रह्मचारी उर्फ मौनी बाबा का है, वे अदैत्य शिवशक्ति महायज्ञ और गीता प्रवचन में व्यास पीठ से श्रद्धालु को संबोधित कर रहे थे।
प्रवचन के दौरान मौनी बाबा ने कहा कि नित्य की साधना और सेवाभाव आदि द्वारा साधारण मनुष्य भी उस स्थान की प्राप्ति कर सकता है। इसके लिए बड़े-बडे देवी-देवता संघर्ष करते हैं। मानव को साधना द्वारा ही महामानव की उपाधि तथा महामानव से सद्गुरु की संज्ञा से विभूषित होता है। उन्होंने कहा जिस प्रकार पछुआ अपने को असुरक्षित देख चारो पैर, मुख व पूंछ समेत अपने कवच पीठ के अंदर प्रतिष्ठित कर लेता है, इसी प्रकार सृष्टि में सर्वोपरी मर्यादित जीव अपने पांचों इंद्रिय और छठवें मन के साथ गुरु कृपारूपी साधना कवच में सदैव ही प्रतिष्ठित रहते हैं। कार्यक्रम में पंडित रामजी मिश्र, मानस मर्मज्ञ रमाशंकर सिंह, रजत ब्रह्मचारी, करुणा निधान भारती, गोरख दास, ओमप्रकाश सिंह, शिव चैतन्य ब्रह्मचारी आदि ने सह भागिता की।

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