प्रधान और एएनएम के पेच में दम तोड़ रहा अभियान

Ballia Updated Tue, 27 Nov 2012 12:00 PM IST
फेफना। स्वास्थ्य महकमे में ‘ग्रामीण स्वच्छता अभियान’ के तहत गांव को साफ-सुथरा रखने की योजना धूल फांकती नजर आ रही है। ग्राम प्रधान और एएनएम के पेंच में लाखों रुपये खाते में डंप पड़े हैं।
शहर के लोग मच्छरों के आतंक से छुटकारा पाने का सपना भले ही देखते हैं। शायद यह हकीकत में बदले, लेकिन फिलहाल पूरी तरह फ्लाप साबित हो रही है। कारण कि शहर में नगर पालिका के पास मच्छरों को भगाने के लिए पर्याप्त साधन हैं। मलेरिया विभाग आवश्यक कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराता है। इसके लिए विभाग को प्रतिमाह लाखों रुपये शासन से मिलता है,लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में मच्छरों से निजात पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। इनसे जनता खुद जंग लड़ती है।
स्वास्थ्य महकमा ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीण स्वच्छता अभियान के तहत संपूर्ण ग्रामीण स्वच्छता समिति का गठन कर उसके खाते में प्रतिवर्ष दस हजार रुपये भेज रहा है। जिसका खर्च करने का अधिकार गांव के ग्राम प्रधान एवं एएनएम को संयुक्त रूप से है। धन का अगर सही मायने में सदुपयोग हो तो यह धनराशि एक गांव की स्वच्छता के लिए वार्षिक रूप से पर्याप्त है। आलम यह है कि 90 फीसदी धनराशि खाते में आने के बाद भी खर्च नहीं किया जा सका है। सबसे दिलचस्प तो यह है जानकारी के अभाव में अथवा लापरवाही के चलते कई गांवों में प्रधान एवं एएनएम के संयुक्त खाते भी नहीं खोले गए हैं। क्षेत्र के कई ऐसे भी गांव है जहां पिछले कई वर्षों में मच्छर आदि के काटने से मलेरिया, कालाजार आदि रोग की लोग चपेट में आ जाते हैं और उनकी मौत भी हो जाती है। सबकुछ जानते हुए न तो महकमे के अफसर इसके लिए तेजी दिखा रहे हैं और न तो गांव की स्वच्छता समिति। ऐसे में ग्रामीणों की सुविधा के लिए मिली धनराशि वरदान की जगह अभिशाप साबित हो रही है। हनुमानगंज विकास खंड के दो फीसदी ग्रामसभा ऐसे हैं, जहां इमानदारी से इस पैसे का सदुपयोग किया जा रहा है।
अधिकांश गांवों में यह पैसा प्रधान और एएनएम के लिए वार्षिक उपहार साबित हो रहा है। जिन गांवों में प्रधान एवं एएनएम का सामंजस्य स्थापित नहीं हो पा रहा है। वहां सरकारी योजना राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) का धन अभी खाते मेें निरर्थक रूप डंप पड़ा हुआ है। इसके लिए न तो स्वास्थ्य विभाग नकेल कसने का बीड़ा उठा रहा है और न तो पंचायत महकमा दोनों विभागोें की उदासीनता से कई गांव में गंदगी का अंबार है। यहां स्वच्छता अभियान का कार्य पूर्ण होते नहीं दिख रहा है।
ऐसे में ग्रामीणों के लिए मच्छरों से मुक्ति दिवास्वप्न ही लग रहा है। थम्हनपुरा के ग्राम प्रधान को इस मद के बारे में बहुत अधिक जानकारी भी नहीं है। जबकि इसी गांव में एक दशक के भीतर करीब दो दर्जन ग्रामीण कालाजार से काल कलवित हो चुके हैं। गांव के प्रधान प्रतिनिधि मोहन वर्मा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को इस गांव के लिए विशेष पैकेज देना चाहिए। जिससे गांव की साफ-सफाई रखी जाय।

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