लंकापति ने किया माता सीता का हरण

Ballia Updated Sun, 21 Oct 2012 12:00 PM IST
बलिया। भृगुमुनि के तपोस्थली में शहर के कदम चौराहा, भृगु आश्रम और रामलीला मैदान में मंचन के दौरान कलाकारों द्वारा भगवान राम के विभिन्न रूपाें को दर्शाया गया। इस दौरान रामलीला कमेटी के मंच से सीता हरण, जटायु उद्धार आदि का मंचन बखूबी किया गया। लीला का दर्शकों ने खूब आनंद उठाया।
शुक्रवार को वनवास के दौरान पंचवटी में प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के साथ कुटी में निवास करते हैं। इसी बीच एक सोने का हिरण कुटी के आसपास मंडराने लगता है। तभी माता सीता की निगाह उस मृग पर पड़ी और राम से उसका आखेट करने का आग्रह किया। सीता के आग्रह पर राम मृग का शिकार करने चल दिए। शिकार पर जाने से पहले राम ने लक्ष्मण को सीता की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी। उधर, मायावी हिरण छलांग लगाते हुए राम को घनघोर जंगल में खींच ले गया। इस दौरान राम ने बाण से हिरण पर वार किया। जिस पर मायावी हिरण ने हाय सीते, हाय राम, लक्ष्मण की आवाज में बोल जमीन पर गिर गया। यह आवाज सुन सीता घबरा गई और लक्ष्मण से वन में जाने का आग्रह किया। लक्ष्मण के समझाने के बाद भी सीता ने हठ की। जिस पर लक्ष्मण कुटी के चारों तरफ लक्ष्मण रेखा खींचकर माता से बाहर न जाने की बात कह वन की ओर चल दिए। मौके की नजाकत देख रावण साधु की वेश में भिक्षा के बहाने सीता माता को उठा लिया और विमान में बैठाकर लंका की ओर चल दिया। रावण आकाश मार्ग के रास्ते लंका की ओर जा रहा था। इसी बीच सीता हे राम, हे लक्ष्मण कहकर चिल्ला रही थी। तभी गिद्धराज जटायु की नजर माता सीता पर पड़ी और रावण के ऊपर चोंच और पंजों से वार करने लगा। यह देख रावण क्रोधित होकर तलवार से जटायु के पंख काट दिए। पंख कटने के साथ ही जटायु राम-राम कहकर धरती पर आ गिरे। इधर जब राम और लक्ष्मण कुटी लौटकर आते है और वहां सीता को न देखकर चकित हो जाते है। दोनों भाई पेड़-पौधे, पशु-पक्षी आदि समेत सभी से सीता के बारे में पूछा। लेकिन सीता का कहीं अता-पता नहीं चला। इसी बीच दोनों भाइयाें की नजर गिद्धराज जटायु पर पड़ी और दोनों उनके पास गए और जख्मी होने का कारण पूछा। जिस पर जटायु ने उन लोगों का परिचय जान सीता के विषय में जानकारी दी। कहा कि लंका का राजा रावण सीता को हरण कर लंका की ओर ले जा रहा था। उनकी चीख सुन मैंने उससे युद्ध किया, जिसने मेरी यह दशा की। यह सुन राम ने अपने गोदी में लेकर सहलाया। प्रभु राम के सहलाते ही जटायु ने राम-राम कहकर दम तोड़ दिया।
रसड़ा संवाददाता के अनुसार रामलीला के सातवें दिन सूर्पणखा रावण से जाकर बोली कि मैं आकाश मार्ग से जा रही थी कि पंचवटी में पास एक सुंदर दमनी स्त्री दिखी, जिनका नाम सीता था। मैं सोची कि इस सुंदरी को लंका में रहना चाहिए। इसलिए मैंने उसे लाने के लिए बहुत कोशिश की। लेकिन उसके पति एवं उसके छोटे भाई लक्ष्मण ने मेरा नाक-कान काट दिया एवं भाई खर-दूषण का भी संहार कर डाला। बहन की बात सुन रावण क्रोधित हो उठता है और मामा मारीच को साथ लेकर पंचवटी के लिए निकल पड़ता है। उस समय सीता कुटीर के समीप फुलवारी से फूल तोड़ रही थी। ठीक उसी समय छलवशत मामा मारूच रूप धारण कर सोने का मृग बनकर सीता के सामने खड़ा हो गया। सीता मृग को पाने के लिए लालायित हो उठती हैं। राम एवं लक्ष्‍मण से मृग पकड़ कर लाने को कहती हैं। हालांकि लक्ष्मण बार-बार कह रहे थे यह छल है। सीता की जिद्द के आगे राम झुकते हुए उन्हें लक्ष्मण के हवाले कर मृग को पकड़ने निकल पड़े।

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