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प्रेम की रस्सी में परमेश्वर को बांधने वाला सुदामा

Ballia Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
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बिल्थरारोड (संवाददाता)। संत सद्गुरु के शरणागत शिष्य साधक संयम एवं साधना के पथ पर चलकर सुदामा बन सकता है। सुदामा का अर्थ है, संयमशील व जितेंद्रिय साधक, जो सु अर्थात सुदृढ़ एवं प्रेम की रस्सी से परमेश्वर को बांधता है, वही सुदामा कहलाता है।
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यह बात परिब्राजकाचार्य स्वामी श्री ईश्वरदास ब्रह्मचारी उर्फ मौनी बाबा ने प्रवचन के दौरान कही। वे श्रीवनखंडीनाथ (श्रीनागेश्वरनाथ महादेव) मठ सेवा संस्थान के तत्वावधान में चल रहे 68 दिवसीय रूद्राभिषेक व सत्संग प्रवचन कार्यक्रम में व्यास गद्दी से श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। मौनी बाबा ने श्रीकृष्ण-सुदामा प्रसंग का तात्विक विवेचन करते हुए कहा कि जो संयमी महापुरुष होते हैं तथा जितेंद्रिय व प्रेम पाश में जगदाधार प्रभु को आबद्ध करने वाले हैं, वे ही सुदामा हैं। कहा कि जहां ब्रह्म विद्या, आत्म विद्या व अध्यात्म विद्या फलित होती है। वहीं ऐसे विद्या संपन्न माता के यहां सुदामा जैसे महापुरुष का प्रादुर्भाव होता है। ऐसे अध्यात्म प्रेमियों को चाहिए कि वे अपने हृदय में सद्गुणों की अभिवृद्धि करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो आप भी एक दिन सुदामा के समान भगवान के मित्र बन जाएंगे। उन्होंने कहा कि जिस मनुष्य को यातनाएंं नहीं सहनी हैं वे श्रद्धालु सत्य पथ का पथिक बनें।

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