छात्रसंघ में भागीदारी के लिए कसक रही छात्राएं

Ballia Updated Thu, 04 Oct 2012 12:00 PM IST
बलिया। महिलाओं को हर क्षेत्र में आरक्षण दिया जा रहा है। यहां तक की त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा एवं लोकसभा में भी महिलाओं की सीट आरक्षित है। फिलहाल छात्रसंघ चुनाव में सीट आरक्षित न होने से चुनाव लड़ने को उत्सुक छात्राएं कसक रही हैं। वहीं छात्रसंघ के वर्तमान माहौल को देख चुनाव से तौबा करने में ही भलाई समझ रही हैं।
नीतू सिंह ने बताया कि जिले की जो सोच है उसके मुताबिक अभी छात्राएं छात्रसंघ चुनाव में उतरने के लिए सोच नहीं सकती। यदि कोई छात्रा चुनाव लड़ने का मन भी बनाए तो उसको समर्थन मिलना काफी कठिन होगा। फिलहाल माहौल बेहतर नहीं है कि छात्राएं चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतरें। वंदिता सिंह ने कहा कि ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव देश की राजनीति की नर्सरी है। इसमें महिलाओं की भी सहभागिता होनी चाहिए। लेकिन यहां का माहौल अपने अनुकूल न देख छात्राएं चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हुए भी चुनाव लड़ने से वंचित रह जाती हैं।
रुकमनी ने कहा कि मम्मी पापा तो छात्रसंघ चुनाव लड़ने की इजाजत दे सकते हैं। लेकिन कालेज के महौल को देखते हुए चुनाव लड़ना काफी कठिन है। यह बात सही है कि छात्रसंघ में सहभागिता कर ही महिलाओं का उत्थान होगा। लेकिन यहां के लोगों की सोच बहुत अच्छी नहीं है।
स्मिता ने बताया कि छात्र संघ चुनाव कराना सरकार का एक अच्छा निर्णय है। इससे छात्र-छात्राओं में एक विश्वास जगेगा और महाविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था सुधरेगी। लेकिन छात्रसंघ में पिछले छात्र नेताओं की स्थिति को देखते हुए कोई छात्रा चुनाव लड़ना नहीं चाहेगी। निहारिका ने बताया कि अन्य व्यवस्थाओं में महिलाओं के आरक्षण की तरह छात्रसंघ चुनाव में भी आरक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि छात्राएं भी आसानी से चुनाव लड़ सकें। जब छात्राओं के लिए छात्रसंघ में आरक्षण होगा तो छात्रसंघ का एक अलग ही महौल होगा। प्रज्ञा चतुर्वेदी ने छात्रसंघ चुनाव के लिए लिंगदोह कमेटी की संस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि एक ही महाविद्यालय में स्ववित्तपोषित विषयों के छात्रों को चुनाव से वंचित करना अच्छा नहीं है। उनको भी सदस्य बनाकर मतदान करने व चुनाव लड़ने का अधिकार देना चाहिए था। साथ ही छात्राओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए थी।

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