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केंद्र सरकार कर रही देश के करोड़ों दुकानदारों की अनदेखी

Ballia Updated Sun, 16 Sep 2012 12:00 PM IST
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बलिया। यूपीए सरकार ने एफडीआई की स्वीकृति देकर दुकानदारों, किसानों, मजदूरों एवं छोटे व्यापारियों की अनदेखी की है। इसको लेकर जनपद के व्यापारियों में उबाल है। व्यापारियों का कहना है कि इससे बेरोजगारी बढ़ेगी। इसका विरोध देश की हर जनता को सरकार के वापस लेने तक करना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो यह देशवासियों के लिए बेहतर नहीं है।
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इंदू मार्केट स्थित लवली स्टोर की संचालिका पूनम जायसवाल ने इसका कड़ा विरोध किया। कहा कि इससे देश के करोड़े छोटे व्यापारी प्रभावित होंगे। जनरल स्टोर की संचालिका शीला ने कहा कि पहले से ही देश की आमजनता महंगाई से बिलबिला रही है। ऐसे दौर में रिटेल में विदेशी कंपनियों के निवेश की छूट से देश का माहौल बदल जाएगा। बेरोजगारी व गरीबी बढ़ जाएगी। साड़ी व्यवसायी सारिका ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री पागल हो चुके हैं। उनको देशवासियों की तनिक भी चिंता नहीं है। इसका उदाहरण एफडीआई की स्वीकृति है। साड़ी व्यवसायी मीरा यादव ने बताया कि बड़े स्तर पर निष्कर्ष नहीं आने तक व्यापारियों को सड़क पर उतरकर आंदोलन करना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो विदेशी कंपनियों की दलाल हो चुकी केंद्र सरकार को इसकी समझ नहीं आएगी कि वह क्या अच्छा कर रही है और क्या बुरा? इंजन व्यवसायी राकेश अग्रवाल ने कहा कि यह अनुचित है। हमसभी इसका विरोध करते हैं। सुनील ने कहा कि एफडीआई की स्वीकृति देश को गुलाम बनाने की दिशा में की गई पहल है। विक्रमा प्रसाद व प्रशांत कुमार ने संयुक्त रूप से कहा कि केंद्र सरकार रोजगार देने के बजाए छिनने का कार्य कर रही है। किसी कीमत पर व्यापारी इस बर्दाश्त नहीं करेंगे। कहा कि केंद्र सरकार की यह नीति आम जनमानस के साथ ही व्यापार विरोधी है।
भारत को आर्थिक गुलाम बनाने का षडयंत्र : रमाशंकर तिवारी
बलिया। देश में विदेशी कंपनियों को दुकान खोलने की अनुमति देकर सरकार ने भारत को आर्थिक तौर पर गुलाम बनाने के अंतरर्राष्ट्रीय षडयंत्र करने वाले दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिया है। विदेशी आर्थिक निवेश की यह छूट देश के खुदरा व्यापारियों को ही नहीं बल्कि पूंजी की अल्पता के चलते सब्जी बेचकर गुजारा करने वालों तक को भूखमरी के कगार पर लाकर खड़ा कर देगी। इसे स्वीकार करना राष्ट्रीय सम्प्रभुता के साथ सौदा करना है। यह बाते गंगा मुक्ति एवं प्रदूषण विरोधी अभियान के राष्ट्रीय प्रभारी रमाशंकर तिवारी ने शनिवार को पत्रकारों से कही।
उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण की प्रक्रिया के चलते कंगाल हो रहे देशों की निगाहें भारतीय बाजार को ही अपहरण करने की फिराक में है। श्री तिवारी ने भारत के शासक वर्ग को सावधान करते हुए कहा कि देश में ब्रिटीश हुकूमत भी बाजारों का रास्ता तय कर राष्ट्र का मालिक बन बैठी। कहा कि पूंजी के लोभ में भारत के घर-आंगन को विश्व बाजार बनाने का सरकार यह खतरनाक नजरिया खेल, भारतीय समृद्धि और सौंदर्य दोनों को खा जाएगा। उन्होंने राष्ट्र के राजनैतिक दलों, व्यापारियों, लेखकों तथा पत्रकारों एवं अन्य बुद्धिजीवियों से अनुरोध किया कि वे मनमोहन सरकार को ऐसा अदूरदर्शी निर्णय नहीं लेने के लिए मजबूर करने को आगे आए।

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