बेबस निगाहें देख रहीं गंगा की विनाशलीला

Ballia Updated Sun, 02 Sep 2012 12:00 PM IST
रामगढ़। गंगा के जलस्तर में लगातार गिरावट जारी है फिर भी गंगा अपनी लहरों के धार में उजाड़खंड के बाद खाली पड़ी भूमि को निगलती जा रही है। कटान पीड़ित बेबस और लाचार आंखों के सामने अपनी जमीनों को गंगा में समाहित होते देखते रह जा रहे हैं। कुछ ही पल में गंगा की विनाशकारी लहरें जमीन को अपने पेटे में समाहित करती जा रही है।
हर साल गंगा की बेगावती लहरें अपना कहर बरसाकर सैकड़ों परिवारों को बेघर कर देती हैं। साथ ही उनकी कृषि योग्य भूमि को भी निगलकर उनके निवाले पर भी ग्रहण लगाती रहती है। गंगा के तटवर्ती लोगों को यह समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर कब तक उनको गंगा की लहरें घर से बेघर करती रहेंगी। क्या शासन-प्रशासन के पास कोई ऐसी तरकीब नहीं कि हर साल गंगा में समाहित होने वाले कृषि योग्य भूमि को रोका जा सके। अगर इसी तरह से शासन-प्रशासन एवं जनप्रतिनिधि उदासीन बने रहे तो हर साल किसी न किसी तटवर्ती गांव गंगा की लहरों की भेंट चढ़ जाएंगे। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गंगा का जलस्तर 57.260 मीटर दर्ज किया गया है। साथ ही आधा सेमी प्रति घंटा के हिसाब से गंगा के जलस्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है।

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