अत्याचार और अनाचार देता है क्रांति को जन्म

Ballia Updated Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
सुखपुरा। धरती पर जब-जब अत्याचार और अनाचार बढ़ा है, तब-तब क्रांति ने जनम लिया है। 1942 में अंग्रेजों के अत्याचार और दमन चक्र ने अहिंसा के पुजारियों की नसों में देशवासियों के गर्म लहू प्रभावित करने लगा।
इस दौरान महात्मा गांधी को सर्वसम्मति से नेता चुना गया। गांधी ने कहा कि यदि तुम जीना चाहते हो तो मरना सीखो, अब भारत वंशियों के लिए एक ही रास्ता था करो या मरो। इसके बाद अब ब्रितानिया सरकार ने सभी नेताओं को जेलों में बंद करना शुरू कर दिया। इसके साथ ही पूरे देश में आग लग गई। जनता पूरी तरह से अनियंत्रित हो गई और ब्रितानी सिपाहियों की गोलियों से बहुत सी महिलाएं बेवा हो गईं और माताओं के गोद सुने हो गए। उन्हीं क्रांतिकारियों के याद में 23 अगस्त को सुखपुरा के लोग शहीद दिवस के रूप में मनाते हैं। सुखपुरा के दक्षिण में गणपति का पुल है, उस दौरान लोगों ने उसे तोड़ दिया। आंवला नाला पानी से भरा था, इसलिए बलिया का सुखपुरा से मार्ग अवरुद्ध हो गया। गांव में जगह-जगह तिरंगा फहरा दिया गया था। अंग्रेजों के विरुद्ध जनता में जबर्दस्त आक्रोश था। बांसडीह थाने के सिपाही सुखपुरा आना भी बंद कर दिए। सुखपुरा के क्रांतिकारियों की रणनीति सफल रही। यह सब छापामार युद्ध का कमाल था। कुलदीप सिंह द्वारा जगह-जगह खुफिया तंत्र लगा दिया गया था। अंग्रेजों की हर गतिविधि पर उनकी नजर थी। बांसडीह थाने का सिपाही उमर खां सुखपुरा में ही रहता था। सबसे घुलमिल गया था। उसपर कोई शक नहीं करता था। वह सभी कांग्रेसियों की गतिविधियों को जानता था। उस समय कांग्रेस के कुलदीप सिंह अध्यक्ष थे। चंडीलाल व नागेश्वर राय कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता हुआ करते थे। उनको जानकारी मिली की उभांव थाना के पांच सिपाही बलिया आने वाले हैं। वे पैदल आ रहे थे। सिपाही भरखरा गांव में रुके थे। चार सिपाही स्नान करने गए थे, एक सिपाही वहां पहरा दे रहा था। यह जानकारी सुखपुरा के क्रांतिकारियों को हुई तो क्रांतिकारी हीरा, रामकिशुन, जीउत, नागेश्वर राय, बैजनाथ पांडेय, राधा राय, कुलदीप सिंह भरखरा पहुंचे और मुसाफिर चौधरी से मिले। तब बैजनाथ पांडेय ने पहरेदार सिपाही को पीछे से पकड़ लिया और उनकी बंदूकें छिन ली। पांचों ने बंदूक और वर्दी ली और वहां से भाग निकले। सिपाहियों ने इसकी सूचना बलिया पहुंचकर अपने उच्चाधिकारियों को दी। इस बात से गुस्साए अंग्रेज अधिकारी लावलश्कर के साथ सुखपुरा पहुंचे। अधिकारी सबसे पहले अमनशांति सेना के अध्यक्ष यदुनाथ गिरी के घर गए। यदुनाथ गिरी किसी तरीके से पीछे से छत से भाग निकले। आक्रोशित पुलिस वालों ने उनके कुत्ते व हाथी को गोली मार दी। इसके बाद वे गौरी शंकर के घर गए, क्योंकि गौरीशंकर सिपाहियों से भरखरा से बलिया जाते समय उलझे थे। वहां अंग्रेज सिपाहियों से गौरी शंकर मिले तो उन्होंने गौरीशंकर को गोली मार दी। गांव में अंग्रेज पुलिस लगी हुई थी। इसी बीच कांग्रेसी चंडी लाल उन्हें दिख गए और उन्हें भी गोली मार दी। कांग्रेस के अध्यक्ष कुलदीप सिंह कहां लापता हो गए यह पता नहीं चला। इन्हीं शहीदों की याद में सुखपुरा में 23 अगस्त को शहीद दिवस मनाया जाता है।

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