जंग-ए-आजादी का नायक बलिया

Ballia Updated Sun, 19 Aug 2012 12:00 PM IST
बलिया। उत्तर प्रदेश के पूर्वी छोर पर बसा बलिया जनपद बलिया जंग-ए-आजादी का नायक रहा है। क्रांति आंदोलन का पहला चरण नौ अगस्त 1942 को शुरू हुआ। उसी दिन 15 वर्षीय साहसी कार्यकर्ता सूरज प्रसाद ने सेंसर के बाद भी एक हिंदी समाचार पत्र से जानकारी ली और भोपा बजाकर गांधी जी समेत अन्य नेताओं के गिरफ्तारी की जानकारी दी। यह सूचना मिलने के बाद बलिया में क्रांति की चिंगारी धधकने लगी।
10 अगस्त को सुबह बलिया नगर के मध्य स्थित ओक्डेनगंज पुलिस चौकी से सटे पूरबी चौराहे पर लोग गांधी की जय, भारत माता की जय तथा इंकलाब जिंदाबाद के नारे एकाएक गूंज उठे। क्रांतिकारी उमाशंकर सिंह एवं सूरज प्रसाद के नेतृत्व में गगनभेदी नारे लगाए गए। इसके बाद शहर में हड़ताल की घोषणा के साथ ही विशाल जुलूस निकाल कर विरोध प्रदर्शन किया। यह जुलूस बलिया अगस्त क्रांति का शंखनाद था।
11 अगस्त को शहर में विद्यार्थियों ने जुलूस निकाला तथा चौक में सभा की। सभा को पंडित रामअनंत पांडेय ने संबोधित किया तथा कचहरी बंद कर दी गई। उस समय तत्कालीन प्रशासन द्वारा पं. रामअनंत पांडेय को गिरफ्तार कर लिया गया। यही से क्रांति की लहर गांव-गांव तक पहुंच गई। इसके बाद रानीगंज, बिल्थरारोड, खेजुरी आदि में भी जुलूस निकाला गया।
12 अगस्त जिलेवासियों के लिए आज का दिन काफी अहम रहा। युवा वर्ग तथा प्रबुद्ध छात्रगण आगे आए तथा क्रांति का व्यापक रूप देने का कार्य किया। इस दिन क्रांतिकारियों ने जिले की संचार व्यवस्था छिन्न-भिन्न कर दी। क्रांतिकारियों का जुलूस शहर में घूम रहा था इसी बीच रेलवे गेट के पास हाकिम परगना मु. ओवैस के नेतृत्व में 100 हथियारबंद पुलिस के जवानों ने उन्हेें रोका। जुलूस में शामिल क्रांतिकारी रुकने से इनकार कर दिए। इस पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसका आंदोलनकारियों ने जोरदार जवाब दिया। छात्रों ने रेल पटरी उखाड़ी, पथराव किया। इस पर पुलिस के जवानों ने उनकी निर्दयता पूर्वक पिटाई की। लाठीचार्ज के बावजूद जुलूस बढ़ता रहा। रात्रि में छात्र और छात्र नेताओं को दबिश देकर उनके घरों से गिरफ्तार किया गया।
13 अगस्त को गुलामी की जंजीरों से आजाद होने के लिए स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाएं भी कूद पड़ीं। क्रांतिकारी महिलाओं की टोली ने जजी कचहरी पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
14 अगस्त को इस दिन शहर में प्राय: शांति रही, लेकिन जनपद के प्रमुख स्थानों पर विद्रोह ने उग्र रूप धारण कर लिया था। देश की आजादी के लिए महिलाओं के साथ छात्राएं भी आंदोलन में कूद गई। छात्र-छात्राओं ने बिल्थरारोड में यात्रियों से भरी ट्रेन को फूंक दी। रेलवे स्टेशन को आग लगा दिया और रेल पटरी उखाड़ दी। डाकघर भी आग के हवाले कर दिया गया। जिले में विभिन्न स्थानों पर भी तोड़फोड़ व आगजनी की घटनाएं हुई थी। 15 अगस्त को रेवती के लिए काफी अहम है। इस दिन क्रांतिकारियाें ने रेललाइन उखाड़ने, जगह-जगह खाई खोदकर संपर्क मार्ग को बंद करने, एकजुटता प्रदर्शित करने के बाद रेवती को आजाद करा लिया। इस दिन जनपदवासी एकजुट हो जमकर प्रदर्शन किए। हजारों की संख्या में क्रांतिकारियों का जनसमूह इंकलाब जिंदाबाद, अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा लगाते रहे। (16 अगस्त से 19 अगस्त तक दूसरे भाग में)

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