मां ने उजाड़ा घर-बार कौन लगाए नैया पार

Ballia Updated Fri, 17 Aug 2012 12:00 PM IST
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रामगढ़। हर साल गंगा की तबाही का दंश झेल रहे लोगों की हालत दिन प्रतिदिन बद से बदतर होती जा रही है। गांव को बचाने के लिए ठोस पहल न होने के कारण हर साल कोई न कोई गांव का अस्तित्व मिट जाता है। साथ ही गांव वाले दर की दर ठोकरें खाने को मजबूर हो जाते हैं।
हर साल की तरह इस वर्ष भी गंगा ने रिकनी छपरा गांव का इतिहास भूगोल बदल दिया। पीड़ितों का कहना है कि जब मां ने ही अपने लाडलों का घर-द्वार उजाड़ दिया तो अब कौन लगाएगा नइया पार। गंगा की प्रलयकारी लहर से रिकननी छपरा में अफरातफरी का माहौल कायम हो गया। साथ ही पीड़ितों क ा अमनचैन के साथ सुखमय जिंदगी गंगा की लहरों में दब गई है। गांव के लोग पाई-पाई जुटाकर बनाए घरों को अपने हाथों तोड़कर सुरक्षित ठौर देने में जुटे हुए हैं। वहीं इस क्षेत्र में इंद्रदेव का कहर हो जाने पर लोगों को अपने सामानों को भगवान भरोसे नदी के किनारे छोड़ने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है। क्याेंकि सामानों को सुरक्षित स्थानों पर ठहर देने के लिए काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गंगा का जल स्तर गुरुवार को 57.490 मीटर पर स्थिर बना हुआ है।

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