गंगा के आंदोलन को केंद्र सरकार कर रही है नजरअंदाज

Ballia Updated Tue, 17 Jul 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
बलिया। गंगा की आजादी के लिए चल रहे आंदोलन को केंद्र सरकार हर बार नजर अंदाज कर रही है। जिसके चलते गंगा अंतर्राष्ट्रीय बाजार बनती जा रही है। देशी-विदेशी कुछ आर्थिक ताकतें साफ-सफाई के नाम पर केंद्र द्वारा जारी 15 हजार करोड़ की खर्च होने वाली धनराशि को हड़पने का कु चक्र रच रही हैं। उक्त बातें गंगा मुक्ति एवं प्रदूषण विरोधी अभियान के राष्ट्रीय प्रभारी रमाशंकर तिवारी ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहीं।
विज्ञापन

श्री तिवारी ने कहा कि आर्थिक नीतियों को बदले बिना गंगा की समस्या कदापि हल होने वाली नहीं है। देश में आस्था कमाऊ पुत बनकर पूंजी परस्ती को खाद पानी पहुंचा रही है। कहा कि केंद्र सरकार बिजली उत्पादन के लिए गंगा का नहीं बल्कि पवन चक्की का सहारा लेना चाहिए।
उप्र में के कानपुर में गंगा प्रदूषण का उच्चतम शिखर तय कर चुकी है। जिसे केंद्र बनाकर पूरे देश में गंगा सफाई का मसनक तय किया जाना चाहिए। गंगा की आजादी का आंदोलन सबसे ज्यादा उत्तरांचल में करने की जरूरत है, जहां पतित पावनी गंगा शत-प्रतिशत बाजार बाद की चपेट में आ चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
  • Downloads

Follow Us