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संतों और योगियों को अपनी मृत्यु का होता है आभास

Ballia Updated Thu, 28 Jun 2012 12:00 PM IST
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बलिया। केवल ज्ञान से ही मुक्ति प्राप्त नहीं होती, शास्त्रों द्वारा प्रदत्त ज्ञान से यदि मानव जीवन का कल्याण न हो तो ऐसा ज्ञान व्यर्थ है। ज्ञान प्रयोगधर्मी होना चाहिए। सद्गुरु द्वारा दिया गया ज्ञान तभी कल्याणकारी है, जब इसे जीवन में उतारा जाए।
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यह बात रामपुर उद्याभान स्थित श्रीरामजानकी सदन पर आयोजित श्रीमद्भागवत पुराण कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह में भक्तों का संबोधित करते हुए काशी के व्यास डा. सुनील ने कहीं। उन्होंने कहा कि चित्त में राम और चिंतन में राम दोनों के समन्वय से प्राप्त समग्र रूप से कल्याणकारी एवं मुक्ति देने वाला है। भक्तिरहित ज्ञान अंधा होता है और ज्ञान के बिना भक्ति पंगु है। व्यास जी ने बताया कि शुकदेव स्वामी ने राजा परीक्षित को ज्ञान देते हुए कहा था कि व्यर्थ का शोक मत करो, ज्ञान को अपने जीवन में उतारो। केवल संतों, योगियों को ही अपने मृत्यु का ज्ञान होता है। व्यास जी ने कहा कि संत स्वयं दुख में रहते हुए दूसरों को सुख प्रदान करता है। जबकि जीव स्वयं सुखी रहते हुए दूसरों को सुख देता है। जीव राग, द्वेश, सुख-दुख से प्रकाशित रहता है, जबकि संत इससे परे है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के अवतार की चर्चा करते हुए कहा कि राम का जीवन, राम का चरित्र और राम की लीलाएं मर्यादित हैं, इसीलिए अनुकरणीय है। भगवान श्रीराम पूर्णावतार हैं। भगवान श्रीकृष्ण का पूर्णावतार है। दोनों का अवतरण ग्रह-नक्षत्र के प्रभाव के कारण हुआ। दोनों पूर्णावतारी पर ब्रह्म के लीलाओं की दिशा अलग-अलग ढंग से प्रस्फुटित हुईं। भगवान श्रीराम सूर्यवंशी इनका जन्म दिन को 12 बजे हुआ था। सूर्य बुद्धि के देवता हैं। जबकि कृष्ण चंद्रवंशी थे, जिनका प्राकट्य मध्य रात्रि को 12 बजे हुआ था। चंद्रमा मन के देवता हैं। यही कारण है कि कृष्ण ने इंद्रियों को नियंत्रित किया। इन्होंने भक्ति मार्ग की पुष्टि किया। कहा कि कृष्ण का चरित्र चिंतन का विषय है, भक्ति एवं प्रेम कृष्ण के लीलाओं की व्याख्या के लिए आनिवार्य है। कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के लीलाओं का जो उल्लेख भागवत में मिलता है। इसके मुताबिक गोकुल में इनकी लीला 11, मथुरा में 14 व द्वारिका में 100 वर्ष की है। इस प्रकार नरहरि श्रीकृष्ण की आयु 125 वर्ष की है। कहा कि कृष्ण को प्रेम व भक्ति के बिना नहीं समझा जा सकता। गोपालजी, बालकृष्ण, डा. प्रदीप, ज्योतिस्वरूप, डा. विनय, प्रभात, अनिल सहित सैकड़ों श्रीमद्भागवत प्रेमी मौजूद रहे।

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