परमात्मा को जानने के लिए श्रद्धा जरूरी

Ballia Updated Fri, 22 Jun 2012 12:00 PM IST
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सुरेमनपुर। भारत में पैदा होकर जिसने राम को नहीं जाना, भारतीयता, संस्कृति, मानवता, वेद, भागवत, गायत्री, रामचरित मानस व गोविंद को नहीं जाना। मानव तत्व को प्राप्त किया तो क्या किया। दुनिया में कितना भी बड़ा धनपति हो, जीवन में जिसने ईश्वर को नहीं जाना उसने कुछ नहीं जाना।
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यह बात दुर्जनपुर स्थित रामजानकी प्राण प्रतिष्ठा व राम महायज्ञ के अंतिम दिन प्रवचन के दौरान भारत माता मंदिर हरिद्वार से पधारी पक्षी देवी ने कही। उन्होंने कहा कि परिपक्व श्रद्धा कभी समाप्त नहीं होती, जब कोई पौधा छोटा होता है तो उसे र्कोई भी उखाड़ लेता है। जब बड़ा हो जाता है तो उसकी जड़ें जमीन को जकड़ लेती है तो उसे कोई उखाड़ नहीं पाता है। कहा कि संसार में एक ही वस्तु सत्य है, वह है ईश्वर, बाकी सभी चीज असत्य है। जो भगवान के भक्त होते हैं उसको तो मुक्ति मिलती ही है। लेकिन जो भगवान के भक्त का चरण पकड़ लेता है, उससे भगवान अपने भक्त से पहले मुक्ति दे देते हैं। कहा कि भगवान को प्राप्त करने के लिए अपार श्रद्धा की आवश्यकता होती है। यदि कोई व्यक्ति बुद्धि, ज्ञान व तर्क के द्वारा भगवान को जानना व पहचानना चाहता है तो यह संभव नहीं है। इसके लिए श्रद्धा से भगवान के शरण में जाना पड़ेगा, क्योंकि भगवान बुद्धि व तर्क का विषय नहीं है। राम महायज्ञ के अंतिम दिन राम-जानकी, हनुमान लक्ष्मण, कार्तिकेय, गणेश आदि की प्रतिमाओं को नगर भ्रमण कराया गया। यज्ञ मंडप में सैकड़ों नर-नारियों द्वारा फेरी के दौरान लगाए गए जयकारे से यज्ञ मंडप पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।
गुरुवार हवन-पूजन के साथ रामजानकी प्राण प्रतिष्ठा व राम महायज्ञ का समापन के साथ ही भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें हजारों साधु-संत व ग्रामीणों ने प्रसाद ग्रहण किया।
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