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भगवान की परीक्षा ली तो गंवा दी आंख ः हरिदास

Ballia Updated Wed, 20 Jun 2012 12:00 PM IST
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सुरेमनपुर। ‘‘धर्म नहीं बिगड़ा है बिगड़ा है धर्मधारी, पूजा नहीं बिगड़ा है बिगड़ा है पुजारी। शासन नहीं बिगड़ा है, बिगड़ा है कर्मचारी। बेटा नहीं बिगड़ा है, बिगड़ा है बाप महतारी।।’’ यह बातें दुर्जनपुर स्थित राम जानकी प्राण-प्रतिष्ठा एवं राम महायज्ञ के उपलक्ष्य में प्रवचन के दौरान अयोध्या स्थित सुग्रीव आश्रम के बाल संत श्रीश्री 108 श्री हरिदास जी महाराज ने कहीं। उनकी वाणी से निकल रहे अमृत वर्षा रूपी प्रवचन में क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं ने गोता लगाया।
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उन्होंने कहा कि आज कल जो धर्मचारी है। वो मंच पर चढ़कर वक्तव्य देते हैं, लेकिन स्वयं उसका पालन नहीं करता। कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम पत्नी जानकी का शृंगार कर रहे थे। उस समय यह दृश्य इंद्र का बेटा जयेंद्र देख रहा था। इसी दौरान उसके मन में संदेह हुआ कि यह भगवान नहीं मनुष्य हैं। यदि भगवान होते तो पत्नी का शृंगार नहीं करते। उसने भगवान की परीक्षा लेने का मन बनाया। इसके बाद कौआ का वेष धारण कर जानकी जी के पैर में चोंच मार दी। इससे जानकी मैया के पैर से खून की धारा बहने लगी। यह देखकर प्रभु अचंभित होकर देखने लगे। उसी समय उन्होंने बाण उठाकर जयेंद्र के ऊपर छोड़ दिया। बाण को अपनी ओर आते देखकर जयेंद्र त्राहिमाम करते हुए भागने लगा। वह भागते हुए पिता इंद्र के पास पहुंचे और रक्षा की गुहार लगाई। साथ ही उसने इंद्र को आपबीती सुनाई। इस पर वे आगबबूला हो गए और उन्हें भगा दिया।
इसके बाद वह भगाते हुए कैलाश पर्वत पर पहुंचकर भगवान शंकर से जान की गुहार लगाई, लेकिन भगवान शंकर ने भी उसकी मदद से करने से मना कर दिया। भगवान ब्रह्मा जी के यहां गया तो उन्होंने ने भी उसे भगा दिया। वह भाग रहा था इसी बीच रास्ते में ऋषि नारद मुनि मिले। उसने नारद मुनि को पूरी बात बताने के बाद रक्षा की गुहार लगाई। नारद जी ने कहा कि मैं संत हूं, केवल उपाय बता सकता हूं। उन्होंने रामजी के पैर पर गिरने का उपाय बताया। जब वह प्रभु के शरण में गिर गया तो जानकी मैया ने कहा कि प्रभु देखिए यह स्वयं गिर गया है। इसको माफ कर दीजिए।
इस पर भगवान ने कहा कि जो मेरी शरण में आता है उसकी मैं हत्या नहीं करता हूं। उन्होंने उसे छोटा दंड दिया और उसकी एक आंख फोड़ दी। इस तरह से यज्ञ के पांचवे दिन पुष्प अधिवात, विद्वान पंडितों के मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ। बुधवार को नगर परिक्रमा का आयोजन है। इसकी जानकारी अमर शहीद कौशल कुमार के पौत्र व आयोजक अनिल सिंह ने दी है। बता दे कि इस मंदिर का जीर्णोद्धार अमर शहीद कौशल कुमार के पुत्र स्व.रासबिहार सिंह द्वारा रखा गया था।
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