लग्न शुरू होने से धरती के अमृत में हो रही मिलावट

Ballia Updated Tue, 19 Jun 2012 12:00 PM IST
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बलिया। धरती का अमृत कहे जाने वाले दूध में मिलावटखोरी जोरों पर है। खपत के हिसाब से उपज कम होना मिलावट का कारण बताया जा रहा है। दूध के व्यवसाय से जुड़े लोगों की माने तो लग्न के मौसम की शुरूआत हो जाने के बाद से दूध में मिलावट के चांस बढ़ जाते हैं। दूध व्यवसायियों से खरीदने वाले उपभोक्ताओं को मिलावट वाला दूध ही मिलता ह्रै, क्याेंकि व्यवसायी कम समय के लिए बढ़ने वाले दूध के डिमांड को पूरा करने का इससे आसान कोई तरीका नहीं निकाल पाते हैं। व्यवसायियों के लिए यह मुनाफा वाला काम साबित हो रहा है, जबकि स्वास्थ्य बनाने के लिए दूध लेने वालों के साथ धोखा किया जा रहा है। मक्खन निकाले हुए दूध को दही जमाकर खुलेआम बेचा भी जा रहा है। मक्खन निकाला गया दूध प्रति लीटर 20 रुपये के हिसाब से बाजार में बेच दिया जाता है तथा मक्खन निकाली गई दही 60 से 70 रुपये प्रतिकिलो ग्राहकों को बेच दी जाती है। उधर, चिकित्साधिरी डा. उज्ज्वल प्रकाश का कहना है िक 40 वर्ष से कम आयु के लोगों के लिए फैट की आवश्यकता होती है। ऐसे में दूध से फैट निकल जाने से उनका शारीरिक विकास नहीं हो पाता। जबकि इससे अधिक उम्र के लोगों को वैसे भी फैट की आवश्यकता नहीं होती। उन्हें इससे बचने की भी जरूरत है। मिलावट वाला दूध हर दृष्टिकोण से नुकसानदायक है।
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डा. उज्ज्वल प्रकाश
चिकित्साधिकारी, सीएचसी
दुबहर
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