उच्च शिक्षा में सुधार को हाें ठोस उपाय

Ballia Updated Tue, 19 Jun 2012 12:00 PM IST
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लखनऊ। उच्च शिक्षा में सुधार के लिए क रने होंगे ठोस उपाय प्रदेश में उच्च शिक्षा का हाल बहुत ही चिंताजनक है। विश्वविद्यालयों में शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने और शैक्षिक माहौल बनाने को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देने के लिए राममूर्ति कमेटी ने कई अहम सिफारिशें की थीं। राममूर्ति कमेटी और एक अन्य कमेटी ने उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए प्रोफे शनल ढांचा बनाने का सुझाव दिया था। उन सुधारों को लागू करने की जरूरत है, क्योंकि आज ये विश्वविद्यालय और कालेज बेरोजगार पैदा करने की फैक्ट्री बनकर रह गए हैं। विश्वविद्यालयों में 40 फीसदी पद खाली पड़े हैं। पिछले पांच साल में छात्रों की संख्या में 5 लाख की बढ़ोतरी हुई है लेकिन प्रदेश में इस दौरान महज 28 प्रोफेसरों की नियुक्ति हो पाई है। अस्थायी प्राचार्य रखे जा रहे हैं जो कारगर नहीं है। प्राचार्यों की न पहले वरिष्ठता के आधार पर प्रोफेसर को ही प्राचार्य के रूप में नियुक्ति मिल जाया करती थी। मेरा मानना है कि अनुभवों के आधार पर ही नियुक्ति की प्रक्रिया को दोबारा शुरू करना चाहिए।
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दूसरी समस्या विषय अध्यापकों की है। हालत यह है कि कई जगहों पर एक विषय के एक ही अध्यापक हैं। उनके रिटायरमेंट या लंबे अवकाश पर होने की हालत में उस विषय की पढ़ाई बंद हो जाती है। मेरा सुझाव ये है कि एक विषय के कम से कम दो अध्यापक हर कालेज में होने चाहिए ताकि उस विषय की पढा़ई निर्बाध रूप से जारी रखी जा सके।
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