‘...और बेइमानों के हाथों वतन बिक रहा है’

Ballia Updated Wed, 06 Jun 2012 12:00 PM IST
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बलिया। ‘अमन बिक रहा है, चमन बिक रहा है, बेइमानों के हाथों वतन बिक रहा है...।’ कुछ इसी जज्बा के साथ मंगलवार की देरशाम अन्ना टीम के सदस्यों ने कुछ इन्हीं अल्फाजों के साथ जिला मुख्यालय स्थित टाउन हाल बापू भवन में भ्रष्टाचार के खिलाफ जन संदेश यात्रा के माध्यम से युवाओं में तरूणाई भरने की कोशिश की। अलग-अलग वक्ताओं ने देश की जनता को भ्रष्टाचार के विरूद्ध एकजुट होते हुए दिल्ली के जंतर-मंतर पर आगामी 25 जुलाई से टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसौदिया एवं अन्य के आंदोलन में भाग लेने की अपील की।
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हजारों लोगों से खचाखच भरे टाउन हाल बापू भवन में उपस्थित युवाओं में काफी उत्साह एवं जज्बा देखने को मिला। अभिभूत टीम के सदस्यों ने बागी धरती से उठने वाली परिवर्तन की चिंगारी को एकबार स्मृतियों में ताजा कर दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोपाल राय ने कहा कि समाजकर्मी अन्ना हजारे के पास धन नहीं है। उनका अपना कोई संगठन भी नहीं। लेकिन देश की बदहाली, जनता की भुखमरी, रोटी के लिए बिलबिलाते बच्चे एवं उनकी गरीब मां की आह ने आईएएस रैंक के अधिकारी अरविंद केजरीवाल की अंतरात्मा तक को झकझोर दिया और उन्होंने नौकरी को लात मारते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई। अन्ना हजारे एवं उनके टीम का मात्र एक मकसद है कि हिंदुस्तान के भीतर खजाने लूटने वाले प्रधानमंत्री से लगायत पटवारी तक पर कानूनी कार्रवाई हो। यह परिवर्तन की मांग है। लोकनायक जय प्रकाश नारायन भी देश में परिवर्तन चाहते थे। राष्ट्र में एक-दो लाख पूंजीपतियों का विकास न चाहकर वे एक-एक बच्चे का संपूर्ण विकास चाहते थे। लोकपाल बिल के प्रमुख तीन बिंदुओं में पहले का उल्लेख करते हुए संजय सिंह बताया कि कर्मचारी, अधिकारी या फिर पटवारी तक को भ्रष्टाचार का दोषी पाए जाने पर लोकपाल कार्रवाई करेगी। दूसरे बिंदु के उल्लेख से पूर्व बताया कि देश में 30 रुपये की तिहाड़ी करने वाला गरीब मजदूर जब पटवारी के पास राशन कार्ड बनवाने पहुंचता है तो उसे दो सौ रुपये रिश्वत देनी पड़ती है। दूसरे बिंदु में ऐसों के ऊपर जांच एवं कानूनी कार्रवाई की मांग थी। तीसरे एवं प्रमुख बिंदु पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक देश की जनता भ्रष्टाचारा से निजात पाना चाहती थी। आज मात्र केंद्र ही नहीं, बल्कि इससे भी कहीं ज्यादे भ्रष्टाचार में राज्य सरकारें संलिप्त हैं। इसलिए एक सशक्त जन लोकपाल बिल राज्य में भी लागू करने की मांग की गई थी। लेकिन केंद्र सरकार ने टाल-मटोल के माध्यम से अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों के यहां मामले को पहुंचाया और अंतत: बजट सत्र के अंतिम दिन बिल को समिति के पास भेजा। वास्तव में सत्ता पर काबिज भ्रष्ट लोग कतई चाह ही नहीं रहे हैं कि सशक्त लोकपाल कानून अस्तित्व में आए। इस दौरान दिनेश बाघेला, इलियास आजमी आदि ने अपने विचार रखे।
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