कैंसर कंसेसन टिकट में संशोधन के लिए पीडि़ता को दौड़ाया वाराणसी

Ballia Updated Wed, 06 Jun 2012 12:00 PM IST
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बलिया। रेलवे विभाग अपने कार्यों के प्रति कितना गंभीर है। इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। शहर कोतवाली क्षेत्र के भृगु आश्रम निवासी पीडि़ता अनीता पांडेय से मिलने पर सच्चाई जानने के बाद अच्छे-अच्छों का कलेजा कांप उठा। वह बीते हफ्तेभर से कैंसर कंसेसन टिकट में संसोधन के लिए वाराणसी से बलिया तक का चक्कर लगा रही है। उनका टिकट तीन माह पूर्व आरक्षण टिकट खिड़की से निकाला गया। टिकट में अनीता पति की जगह बेटे का नाम चढ़वाना चाह रही थी, लेकिन हफ्तेभर से बलिया और वाराणसी का चक्कर लगाने के बाद भी उसके यात्रा के दिन मंगलवार तक टिकट नहीं बन पाया। इस पर उसने एसएस कक्ष में पहुंचकर उस समय वहां मौजूद वाणिज्य निरीक्षक के साथ ही अन्य लोगों की उपस्थिति में जमकर हंगामा किया।
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अनीता का कहना था कि उसका इलाज मुंबई के एक अस्पताल में चलता है। उसने बीते तीन माह पूर्व अप पवन एक्सप्रेस से कैंसर कंसेसन के तहत अपना और अपने पति का टिकट बनवाया था, जिसमें यात्रा की तिथि पांच जून अंकित है। बताया कि इसी बीच पति संजय पांडेय का इंदिरा गांधी नेशनल ओपेन यूनिवर्सिटी (इग्नू) में किसी विषय की परीक्षा शुरू हो गई है। परीक्षा प्रवेश पत्र के साथ ही संबंधित प्रपत्रों के साथ मैने एसएस व संबंधित अधिकारी से संपर्क कर हफ्तेभर पूर्व पति की जगह पुत्र का नाम टिकट में दर्ज कराने की अपील की, ताकि यात्रा के समय कोई व्यवधान न हो। इसके बाद एसएस, मुख्य वाणिज्य कर निरीक्षक व वाणिज्य कर निरीक्षक ने मेरे प्रपत्रों का अवलोकन करने के बाद मुझे वाराणसी से आदेश लाने के लिए भेज दिया। बताया कि डीआरएम आफिस में मैने पुत्र को भेजकर आदेश मंगवाया, जिसमें उल्लेख है कि मेरे टिकट में संसोधन कर पति की जगह पुत्र का नाम अंकित कर दिया जाए। इसके बाद भी संबंधित अधिकारियों एवं बुकिंग क्लर्क बलिया में इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं होने की बात कहकर उससे पिंड छुड़ा रहे थे। इस पर अनीता मंगलवार की सुबह एसएस के कक्ष में पहुंची। उस समय स्टेशन अधीक्षक संजय सिंह के छुट्टी होने की जानकारी हुई। साथ ही मौके पर मौजूद मुख्य वाणिज्य कर निरीक्षक एवं वाणिज्य कर निरीक्षक को डीआरएम आफिस के आदेश से अवगत कराया। साथ ही उनके द्वारा आनाकानी करने पर खरी खोटी सुनाई। अनीता को गुस्सा आता देख वाणिज्य कर निरीक्षक किसी माध्यम से संसोधन कराने की बात कर मामले को शांत करने की कोशिश में अपने साथ लेकर चले गए। इस संबंध में मुख्य वाणिज्य कर निरीक्षक उदयशंकर सिंह ने बताया कि महिला को वाराणसी भेजा गया था। क्योंकि टिकट संसोधन की व्यवस्था यहां नहीं है। वाराणसी से जो वो आदेश की कापी लेकर आई है। उसका अवलोकन करने के बाद बुकिंग क्लर्क से बात की गई, लेकिन टिकट में किसी प्रकार की छेड़छाड़ यहां संभव नहीं है।
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