भ्रष्टाचार से लड़ाई की उर्वर भूमि जेपी का गांव

Ballia Updated Wed, 06 Jun 2012 12:00 PM IST
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बलिया। बिहार-यूपी का तटवर्ती क्षेत्र जेपीनगर आजादी के बाद भ्रष्टाचार के विरुद्ध आंदोलन की उर्वर भूमि के रूप में माना जाता है। आजादी के बाद लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े आंदोलन की शुरुआत का बिगुल फूंका था। उसी समय से अब तक अनगिनत समाज कर्मी एवं राजनीतिक खेमेे से निकलने वाली आंदोलन की लहरें देश की दशा एवं दिशा निर्धारित करती रही हैं। इसी की एक कड़ी के रूप में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए मंगलवार को अन्ना टीम के सदस्यों की पहुंचने के तौर पर देखा जा रहा है।
लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने भ्रष्टाचार के खिलाफ संपूर्ण क्रांति के रूप में वर्ष 1973-74 में अपने पैतृक स्थान जय प्रकाश नगर के लाला टोला से सर्वप्रथम आंदोलन की नींव रखी। आजादी के बाद भ्रष्टाचार की मुखालफत करने वाली यह सबसे बड़ी आंदोलन थी। तत्कालीन समय में गुजरात के एक छात्रावास में भोजनालय शुल्क का प्रतिवाद वहां के छात्रों ने मौजूदा चमन भाई के सरकार के खिलाफ उठाई थी। भ्रष्टाचार से जूझ रहे पूरी राष्ट्र में यह लहर वेग की तरह फैल गई तथा बिहार में तत्कालीन अब्दुल गफ्फार के मुख्यमंत्रित्व काल में युवाओं ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन छेड़ दी। यह आंदोलन छात्र स्तर पर था और इसके नेतृत्व से लोकनायक जेपी का दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं था। इसी दौरान वाराणसी के राजघाट स्थित गांधी विद्या केंद्र पर भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलित छात्रों से मिलने लोकनायक जय प्रकाश नारायण पहुंच गए। आंदोलन का नेतृत्व राम बहादुर राय के हाथों था। यहां छात्रों के जनसमूह ने जय प्रकाश से आंदोलन की बागडोर थामने की अपील की थी। लेकिन लोकनायक ने इससे साफ इंकार कर दिया। इस दौरान उनकी छात्राें से काफी देर तक झड़प भी हुई थी। जेपी ने आंदोलन के लिए एक अन्य जय प्रकाश नारायण को ढूंढने तक की बात कह डाली थी। लेकिन छात्र अड़े हुए थे और उन्होंने एक जेपी के रहते हुए दूसरे जेपी की तलाश से इंकार किया। अंतत: लोकनायक ने किसी भी हिंसा से पूरी तरह बचते हुए आंदोलन नेतृत्व का जिम्मा खुद के कंधों पर लिया। इस दौरान उनकी ओर से गुंजायमान, ‘जुल्म चाहे जितना होगा, हाथ हमारे नहीं उठेंगे’, ‘मानेंगे नहीं, मारेंगे नहीं’ सरीके नारा देश के एक-एक युवाओं के होठों पर मानों रच-बस सी गई थी। इस दौरान पटना के गांधी मैदान में भ्रष्टाचार के खिलाफ राम बहादुर राय एवं गोविंदाचार्य के नेतृत्व में हजारों युवाओं के आंदोलन पर पुलिसिया लाठीचार्ज में लोकनायक जेपी तथा जनसंघ के नेता नानाजी देशमुख जख्मी हो गए थे। आंदोलन की धार कुंद करने के उद्देश्य से मौजूदा कांग्रेस सरकार की ओर से आपातकाल की घोषणा कर दी गई। लेकिन आंदोलन की यह उर्वर भूमि आगे चलकर और पुष्ट हुई तथा यहीं से भ्रष्टाचार की चिंगारी निकाली जाने लगी। गौर करें तो इसकी अगली कड़ी के रूप में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने करीब 1980 में जनता पार्टी अध्यक्ष के रूप में जयप्रकाश नगर से पटना तक की यात्रा की थी। हाल ही के 12 अक्टूबर 2012 को लालकृष्ण आडवाणी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी रथयात्रा संपूर्ण क्रांति के पवित्र भूमि से निकालने का निर्णय लिया था। पार्टी सदस्यों का तर्क था कि आजादी का बिगुल फूंकने एवं देश की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने यहां से देश की स्वतंत्रता की नींव डाली थी। शायद इसी के ध्यानगत इस यात्रा को पोरबंदर से नहीं निकाली गई। आखिरकार भ्रष्टाचार मुखालफत की उर्वर जमीन जेपी नगर को माना गया। आज पूरे देश की नेतृत्व को भ्रष्टाचार के विरुद्ध झकझोर कर रखने वाले समाजकर्मी अन्ना हजारे की टीम सदस्य पत्रकार मनीष सिसौदिया, पूर्व राज्य सभा एवं मौजूदा अन्ना टीम के सदस्य इलियास आजमी, संजय सिंह आदि ने भ्रष्टाचार के संक्रमण पर प्रहार के लिए मंगलवार को जेपी नगर को केंद्रबिंदु बनाया।

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