दो साल से भटक रहे मजदूरी के लिए श्रमिक

Ballia Updated Sun, 27 May 2012 12:00 PM IST
नगरा। केंद्र सरकार की ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों का पलायन रोकने और गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने की योजना फ्लाप होते दिख रही है। विकास खंड नगरा में दो साल बाद भी मनरेगा मजदूरों के मजदूरी का भुगतान न होना इसका उदाहरण है। यही नहीं मनरेगा के गाइड लाइनों का खुलम-खुल्ला उलंघन भी जारी है। कहीं पर कार्य कराने के बाद मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ तो कहीं पर बगैर कार्य किए ही मजदूरों के जाबकार्ड पर कार्य का होना दर्शाया गया है।
स्थानीय विकास खंड अंतर्गत डिहवां गांव में दो दर्जन से ऊपर जाबकार्ड धारक महिला मजदूरों का भुगतान अधर में लटका हुआ है। इन मजदूरों के जाब कार्ड पर 16 जून से 25 जून 2010 तक देवढ़िया गांव के पोखरा खुदाई में कार्य दर्शाया गया है। डिहवां गांव से देवढ़िया की दूरी करीब 12 किमी. है। लेकिन वन महकमे द्वारा डिहवा निवासिनी लालसा देवी, सुभगिया देवी, शारदा देवी, चंद्रावती, अनीता, आशा, विजय शंकर, विजय शंकर, सविता, देवनाथ, श्यामदुलारी, कमलावती, मंगली, हेवंती, सोमरिया, कुंती, लल्लन सहित दो दर्जन जाब कार्ड धारकों के कार्ड पर कार्य करना दर्शाया गया है। इस गांव के जाब कार्ड धारकों का आरोप है कि हम अपने ही गांव के पोखरे दो साल पहले खुदाई किए हैं। जिसके मजदूरी का भुगतान अब तक नहीं हो सका है। देवढ़िया गांव स्थित पोखरे में खुदाई का कार्य हम लोगों के द्वारा नहीं किया गया। यह खुलासा स्थानीय ब्लाक के अधिकारियों द्वारा सोशल आडिट करने के दौरान किया गया। ब्लाक के अधिकारी रमाकांत राम ने बताया कि यदि देवढ़िया में पोखरे की खुदाई मान भी ली जाए तो मनरेगा के गाइड लाइन के मुताबिक किसी भी मजदूर को पांच किमी. से अधिक की दूरी पर मजदूरी करने जाने पर देय मजदूरी के अतिरिक्त 10 फीसदी मार्ग व्यय भी देय है। लेकिन डिहवा के मजदूरों के जाब कार्ड पर 100 रुपये के हिसाब से मजदूरी अंकित की गई है। इस तरह के कार्य फर्जीवाडे़ को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त हैं। दो साल पहले गांव के पोखरे की खुदाई वन महकमे द्वारा 24 से 31 मई 2010 तक कराया गया। मजदूरी के लिए जाबकार्ड धारक महकमे की तरफ टकटकी लगाए हुए हैं। यहीं नहीं वन महकमे के अलावा सिंचाई विभाग भी पीछे नहीं है। नहर पर कार्य कराने के बाद पर एक ढेला भी मजदूरों को नहीं मिला है। कुछ जाब कार्डों पर सफेदी लगाकर फर्जी कार्यों को छिपाने का प्रयास भी किया गया है। शासन की मंशा के अनुरूप एक पखवाड़े के अंदर मनरेगा मजदूरों का भुगतान हो जाना चाहिए। इससे केंद्र सरकार की गांवों से मजदूरों का पलायन रोकने की मंशा पर पानी फिर रहा है। वहीं मजदूरों का विश्वास इस योजना से उठने लगा है। वन क्षेत्राधिकारी डीएन यादव ने बताया कि कुछ मजदूरों का खाता नंबर गलत हो गया था। जिससे उनके खातों में धन का स्थानांतरण नहीं हो पाया है।
जल्द ही गलती को सुधारकर मजदूरी का भुगतान किया जाएगा। यदि धांधली मिली तो जांच कराकर दोषी कार्य प्रभारी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर बीडीओ सेवाराम यादव ने कहा कि मजदूरों की तरफ से शिकायत नहीं मिली है। यदि मजदूरों की ओर से शिकायत आती है तो भुगतान के लिए मुख्य विकास अधिकारी के संज्ञान में लाया जाएगा। प्रकरण गंभीर है, जांच कर दोषी के खिलाफ कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा जाएगा।

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