तो कट सकती है मुख्य मार्ग से 50 हजार की आबादी

Ballia Updated Sat, 19 May 2012 12:00 PM IST
सुरेमनपुर। फिर बरसात के दस्तक देने में मात्र दो माह शेष रह गए हैं। लेकिन अब तक रामबालक बाबा पुल को दुरुस्त करने की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। जबकि चुनाव के दौरान कई जनप्रतिनिधियों ने इस पुल के दुरुस्तीकरण के लिए धरना तक दिया था। इससे तय है कि एक बार फिर बरसात के दिनों में उत्तरी दियरांचल के करीब 50 हजार की आबादी मुख्य सड़क मार्ग से कट जाएंगी।
उत्तरी दियरांचल को मुख्य सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए आठ अप्रैल 2005 को सेतु निगम ने निर्माण कार्य शुरू किया। जैसे-तैसे सेतु निगम ने वर्ष 2010 में पुल का निर्माण कार्य पूरा किया। पीडब्ल्यूडी ने पुल के दोनों तरफ के एप्रोच को मिट्टी भर दिया। लेकिन एप्रोच पर भरे गए मिट्टी पर पीचिंग कार्य नहीं हो सका। तब से दो बरसातों में पुल का एप्रोच बार-बार टूटता रहा और क्षेत्रवासियों के दबाव के कारण प्रशासन द्वारा मिट्टी से भरा जाता रहा। लेकिन प्रशासन की लापरवाही से वर्ष 2011 में पुल का एक पाया बैठ गया। साथ ही दोनों तरफ मिट्टी से बने एप्रोच का 70 फीसदी हिस्सा कट गया और पुल की पंखियां टूट-टूट कर गिर गई। लेकिन शिकायत के बावजदू अब तक उसको दुरुस्त करने का कोई प्रयास प्रशासन द्वारा नहीं कराया गया। अब से मात्र दो माह बाद बरसात शुरू होने वाला है। लोगों को भय सता रहा है कि कहीं इस बार घाघरा की लहरें पुल को ही न बहा ले जाएं और उत्तरी दियरांचल के वासी मुख्य सड़क मार्ग से कट न जाएं। इस बाबत सेतू निगम के अवर अभियंता सीपी सिंह ने कहा कि पुल निर्माण के समय इसकी मजबूती के लिए छह पाया बनाया जाना चाहिए था। लेकिन शासन के योजना को ध्यान में रखते हुए मात्र चार पाया का ही पुल बनाया जा सका है। सेतु निगम की टीम ने सर्वें कर शासन के पास रिपोर्ट भेज दिया गया है। शासन से निर्देश व धन मिलने के बाद पुल का सही ढंग से निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा। सुरेमनपुर। फिर बरसात के दस्तक देने में मात्र दो माह शेष रह गए हैं। लेकिन अब तक रामबालक बाबा पुल को दुरुस्त करने की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। जबकि चुनाव के दौरान कई जनप्रतिनिधियों ने इस पुल के दुरुस्तीकरण के लिए धरना तक दिया था। इससे तय है कि एक बार फिर बरसात के दिनों में उत्तरी दियरांचल के करीब 50 हजार की आबादी मुख्य सड़क मार्ग से कट जाएंगी।
उत्तरी दियरांचल को मुख्य सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए आठ अप्रैल 2005 को सेतु निगम ने निर्माण कार्य शुरू किया। जैसे-तैसे सेतु निगम ने वर्ष 2010 में पुल का निर्माण कार्य पूरा किया। पीडब्ल्यूडी ने पुल के दोनों तरफ के एप्रोच को मिट्टी भर दिया। लेकिन एप्रोच पर भरे गए मिट्टी पर पीचिंग कार्य नहीं हो सका। तब से दो बरसातों में पुल का एप्रोच बार-बार टूटता रहा और क्षेत्रवासियों के दबाव के कारण प्रशासन द्वारा मिट्टी से भरा जाता रहा। लेकिन प्रशासन की लापरवाही से वर्ष 2011 में पुल का एक पाया बैठ गया। साथ ही दोनों तरफ मिट्टी से बने एप्रोच का 70 फीसदी हिस्सा कट गया और पुल की पंखियां टूट-टूट कर गिर गई। लेकिन शिकायत के बावजदू अब तक उसको दुरुस्त करने का कोई प्रयास प्रशासन द्वारा नहीं कराया गया। अब से मात्र दो माह बाद बरसात शुरू होने वाला है। लोगों को भय सता रहा है कि कहीं इस बार घाघरा की लहरें पुल को ही न बहा ले जाएं और उत्तरी दियरांचल के वासी मुख्य सड़क मार्ग से कट न जाएं। इस बाबत सेतू निगम के अवर अभियंता सीपी सिंह ने कहा कि पुल निर्माण के समय इसकी मजबूती के लिए छह पाया बनाया जाना चाहिए था। लेकिन शासन के योजना को ध्यान में रखते हुए मात्र चार पाया का ही पुल बनाया जा सका है। सेतु निगम की टीम ने सर्वें कर शासन के पास रिपोर्ट भेज दिया गया है। शासन से निर्देश व धन मिलने के बाद पुल का सही ढंग से निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा।

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