{"_id":"63019","slug":"Ballia-63019-57","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीएमओ से मांगा स्पष्टीकरण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बलिया। सूबे के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य परिवार कल्याण राज्यमंत्री शंखलाल मांझी ने जिले में पदार्पण के बाद गुरुवार की सुबह सदर अस्पताल पहुंचकर मरीजों की पीड़ा सुनी। इस दौरान चिकित्सकों द्वारा बाहर की दवाएं लिखे जाने पर श्री मांझी बिफर उठे और उन्होंने सीएमएस को जमकर फटकार लगाई। अस्पताल में जर्जर व्यवस्था के लिए अधिकारी एवं कर्मचारियों को घंटाें डाटा-फटकारा। राज्यमंत्री के औचक निरीक्षण से अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए हड़कंप की स्थिति मची रही। उन्होंने बाहर से दवा लिखे जाने की शिकायत मिलने पर सीएमओ से स्पष्टीकरण भी मांगा।
जिला अस्पताल पहुंचे राज्यमंत्री शंखलाल मांझी सबसे पहले आपातकालीन वार्ड में पहुंचकर गहन निरीक्षण किया। यहां राज्यमंत्री श्री मांझी ने मरीजों एवं तीमारदारों से अस्पताल से जारी होने वाली दवाओं पर पूर्ण जानकारी ली। उन्हें कुछ मरीजों ने बाहर से दवाएं लिखने की शिकायत की। जिस पर सीएमएस से जानकारी लेते हुए श्री मांझी ने कहा कि अस्पताल को सभी प्रकार की दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। जो दवाएं नहीं हैं उन्हें तत्काल मंगा लिया जाए। आपातकालीन वार्ड में ही एक जली महिला ने शरीर में लगाने वाले क्रीम को बाहर से लाने की शिकायत की। जिस पर उन्होंने सीएमएस की जमकर खिंचाई की। इस दौरान उन्होंने नए अस्पताल भवन के हड्डी वार्ड का भी हाल जाना। अस्पताल में व्याप्त गंदगी को देखकर उसे नोट करते हुए सीएमएस को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान बाहरी दवाओं की शिकायत एवं निजी पर्चियों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने सीएमओ से स्पष्टीकरण मांगा। राज्यमंत्री श्री मांझी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हमें मरीजों को अस्पताल में बाहर से दवाएं लिखे जाने की शिकायत मिली थी। किसी भी हालत में सदर अस्पताल एवं महिला अस्पताल से बाहर की दवाएं नहीं लिखी जाएगी। एकाआध मरीजों ने यह शिकायत किया है कि कुछ सुविधाएं अस्पताल प्रशासन द्वारा उपलब्ध नहीं कराई जातीं। चिकित्सकों के निजी प्रैक्टिस पर कहा कि यह ठीक नहीं है। अगर कोई भी चिकित्सक आवास पर इलाज करता पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कहा कि एमआर अस्पताल के कार्य दिवस में चिकित्सकों से नहीं मिलेंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि चिकित्सकों को नॉन प्रैक्टिस एलाउंस (एनपीए) के रुप में वेतन का 25 फीसदी दिया जाता है, जो कम से कम 16 हजार होते हैं।
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