शिवपुर दियर नई बस्ती के मामले में शिथिलता बरतने को लेकर लगाई गुहार

Ballia Updated Thu, 17 May 2012 12:00 PM IST
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बलिया। दुबहर विकास खंड के शिवुपर दीयर नई बस्ती को जनगणना 2001 के आधार पर जनशून्य कर दिया गया था। इस मामले में शासन के आदेश के अनुपालन में जिलाधिकारी के प्रतिनिधि के रूप में तत्कालीन एसडीएम ने जांच के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की। हीलाहवाली पर गांव के एक युवा समाजसेवी ने राष्ट्रपति सचिवालय, प्रधानमंत्री कार्यालय एवं सर्वोच्च न्यायालय को जनसूचना अधिकार के तहत पत्र लिखकर जानना चाहा है कि शासन के आदेश पर जांच के बाद उसके गांव को स्वतंत्र गांव किन परिस्थितियों में घोषित नहीं किया गया।
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शिवुपर दियर नई बस्ती निवासी समाजसेवी दिनेश प्रसाद ने राष्ट्रपति सचिवालय, पीएमओ एवं सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली से आरटीआई से सूचनाएं मांगी हैं। जिसमें कहा गया है कि शासन के निर्देश पर तत्कालीन जिलाधिकारी सेंथिल पांडियन सी के प्रतिनिधि के रूप में एसडीएम जेएल सरोज ने अपने जांच रिपोर्ट में शिवुपर दीयर नई बस्ती को पुराना राजस्व गांव पाते हुए अपनी आख्या डीएम को सौंपी थी। जिसका हवाला देते हुए पंचायत राज निदेशक से पंचायत ग्राम घोषित कराने की कार्रवाई करने की रिपोर्ट भेजी गई है। इस आधार पर पंचायती राज निदेशक ने कार्रवाई करने के लिए शासन को रिपोर्ट भेज दी। इस प्रकरण में कोई प्रगति नहीं की गई है। उक्त गांव को 2011 में जनगणना के दौरान अखार, जनाड़ी व नगवां दिखाकर ही गणना किया जा रहा था। इसकी जानकारी होते ही दिनेश ने डीएम के नेतृत्व में कराए गए जांच का हवाला देकर जनगणना को स्वतंत्र राजस्व ग्राम सदर तहसील में 819 व भारत का जनगणना कोड 0785 अंकित कर शिवुपर दियर नई बस्ती के नाम किया गया। दिनेश ने इस मामले की अपील सर्वोच्च न्यायालय में की है। जिसे स्वीकार करते हुए अब तक हुई कार्रवाई पर शासन से रिपोर्ट भी तलब की गई है। इस मामले में राष्ट्रपति सचिवालय के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी सौरभ विजय ने अग्रिम कार्रवाई के लिए निर्देश दिया है।
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