नाक का सवाल बना सलेमपुर

Ballia Updated Mon, 05 May 2014 05:30 AM IST
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जितेंद्र उपाध्याय
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मनियर। सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र जहां सभी दलों के लिए महत्वपूर्ण है, वहीं दो मंत्रियों व दो पूर्व मंत्रियों के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी है। सपा सरकार के मौजूदा दो मंत्रियों में से एक रामगोविंद चौधरी प्रदेश सरकार में अपनी मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते हैं, तो दूसरे राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त मो. रिजवी मतदाताओं पर अच्छी पकड़ रखने वाले हैं। इनसे जुड़े मत चुनाव में निर्णायक साबित हो सकते हैं। उधर कांग्रेस के पूर्व मंत्री बच्चा पाठक और राजधारी सिंह भी यहां पर फिर से कांग्रेस को जिंदा करने की कोशिश में हैं।
1957 में गठित 71वीं लोकसभा सीट सलेमपुर प्रदेश की सत्तारूढ़ पार्टी के लिए नाक का सवाल बनी है। कारण कि इसके पांच विधानसभा सीटों भाटपार रानी, सलेमपुर, बेल्थरारोड, सिकंदरपुर, बांसडीह में गत विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी ने ऐतिहासित जीत दर्ज की थी। गौर फरमाने वाली बात यह भी है कि विजयी प्रत्याशी व दूसरे स्थान पर रही पार्टियों में जीत-हार का अंतर भी काफी ज्यादा रहा। यही वजह है कि मंत्रियों सहित पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं ने गत प्रदर्शन को बरकरार रखते हुए आलाकमान को खुश करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। दूसरी ओर पार्टी सुप्रीमो भी आशा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं दोहराने पर मंत्रियों व विधायकों को परिणाम भुगतने की चेतावनी भी कई मौके पर दे चुके हैं। कांग्रेस के लिए भी यह चीज महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब तक 14 चुनावों में सर्वाधिक छह बार यह सीट कांग्रेस के पाले में गई है। वर्ष 2004 व 2009 में वर्तमान कांग्रेस प्रत्याशियों को कांटे की टक्कर में दूसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा था। ऐसे में अपनी ऊंची पहुंच व जातिगत मतदाताओं पर प्रभाव लड़ाई को दिलचस्प बना रहा है। इस सीट से चार बार सांसद रहे हरिकेवल प्रसाद कुशवाहा के राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए रवींद्र कुशवाहा जीत सुनिश्चित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। विपक्षी पार्टी के उम्मीदवार व दो बार लगातार एमएलसी पद पर रहे रविशंकर सिंह पप्पू इस बार हाथी की सवारी कर पार्टी वोटों के साथ ही जातिगत वोटरों में सेंध मारकर कड़ी टक्कर देते दिखाई दे रहे हैं।
1977 के चुनाव में जनता पार्टी के उम्मीदवार रामनरेश कुशवाहा ने कांग्रेस की परंपरागत चली आ रही सीट पर विजय पताका फहराया था। लोगों की मानें तो भाजपा ने जातिगत कार्ड खोल कर दमदार प्रत्याशी मैदान में उतारा है। जिसका लाभ पार्टी को मिलता दिखाई दे रहा है। वहीं भासपा उम्मीदवार व अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर भी विपक्षियों के लिए सिरदर्द बन कर पूरे दमखम के साथ ताल ठोंकते ही नहीं, बल्कि दूसरों को पटखनी देने के मूड में नजर आ रहे हैं। महिला वोटरों की महत्वपूर्ण संख्या को लामबंद करने की मुहिम में भाजपा नेत्री केतकी सिंह दमखम से जुट गई हैं। वहीं पूर्व मंत्री रहे बच्चा पाठक व राजधारी सिंह भी कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करने के लिए दमखम के साथ लगे हैं। कुल मिलाकर कहा जाए तो सड़क, बिजली, शौचालय, जल निकासी जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे सलेमपुर के लोगों का आशीर्वाद व विजयी तिलक किसे नसीब होगा, यह तो भविष्य में पता चलेगा।
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