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राजस्व न्यायालयों में है वादों की भरमार, लंबित हैं 44596 मामले

Varanasi Bureauवाराणसी ब्यूरो Updated Mon, 22 Apr 2019 11:23 PM IST
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बलिया। राजस्व न्यायालयों में 44596 मामले लंबित हैं जिनमें 9730 मामले पांच वर्ष से अधिक पुराने हैं। इसकी वजह 14 अधिकारियों की कमी, समय-समय अधिवक्ताओं के कार्य बहिष्कार है। वर्तमान में लोकसभा चुनाव के चलते अधिकारियों की व्यस्तता है।
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जिले में राजस्व के 33 न्यायालय हैं। इनमें जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी, मुख्य राजस्व अधिकारी, सभी तहसीलों में उप जिलाधिकारी, अपर उप जिलाधिकारी, तहसीलदार, अपर तहसीलदार, नायब तहसीलदार कोर्ट हैं। इन न्यायालयों में राजस्व के 44596 मामले लंबित हैं। फरवरी तक राजस्व न्यायालयों में कुल 46429 मामले लंबित थे जिसमें फरवरी में ही 1631 वाद दर्ज हुए। फरवरी में कुल 1833 मामलों का निस्तारण किया गया और 44596 वाद लंबित हैं। इनमें 9730 वाद पांच साल पुराने हैैं। वर्ष 18-19 में कुल 15914 वादों का निस्तारण किया गया है। अधिकारियों का दावा है कि पूर्व के सालों की अपेक्षा निस्तारण की गति बढ़ी है। अधिकारियों की मानें तो राजस्व न्यायालयों में पीठासीन अधिकारियों की कमी के कारण वादों का निस्तारण प्रभावित हो रहा है। कुल 33 न्यायालयों के सापेक्ष कुल 19 पीठासीन अधिकारी ही हैं। इसमें अपर उपजिलाधिकारी के एक, तहसीलदार के तीन व नायब तहसीलदार के 10 पद सालों से रिक्त हैं और इन न्यायालयों में लंबित मुकदमों में केवल तारीखें ही पड़ती हैं।
जिले के चकबंदी न्यायालयों में भी कुल 5013 मामले लंबित हैं। इसमें से 2656 मामले पांच साल से अधिक हैं जिसका निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इस विभाग में भी अधिकारियों की कमी के कारण वादों का निस्तारण प्रभावित हो रहा है। जिले में उप संचालक चकबंदी के दो पदों के सापेक्ष एक पद रिक्त है। इसके अलावा बंदोबस्त अधिकारी के भी दो के सापेक्ष एक पद रिक्त है। इसके चलते चकबंदी से जुड़े किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
अपर जिलाधिकारी रामआसरे ने बताया कि राजस्व न्यायालयों में अधिकारियों की कमी के साथ ही अन्य कई कारण हैं जिसके चलते वादों का निस्तारण प्रभावित होता है। वर्तमान में राजस्व विभाग के अधिकारी चुनावी कार्य में जुटे हैं जिससे कोर्ट का काम प्रभावित होना लाजिमी है। इसके अलावा समय-समय पर अधिवक्ताओं का कार्य बहिष्कार से भी वादों का निस्तारण प्रभावित होता है। चुनाव बाद राजस्व न्यायालयों में वादों को वरीयता के आधार पर निपटाया जाएगा।

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