चार सालों में महज छह गांव ही लिए गए गोद

Varanasi Bureauवाराणसी ब्यूरो Updated Fri, 28 Sep 2018 01:20 AM IST
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बलिया। जिले में अधिकांश केंद्रीय योजनाएं पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सकी हैं। गांवों के विकास के लिए सांसद आदर्श ग्राम योजना शुरू हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर 2014 को यह योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत सभी सांसदों को एक साल के लिए एक गांव को गोद लेकर वहां विकास कार्य कराने का प्रावधान किया गया इसे आदर्श गांव बनाने बनाने का सपना संजोया गया। लेकिन चार सालों में तीन सांसदों से आच्छादित जिले के महज छह गांव ही चयनित हो सके। इन गांवों की दशा आज भी सुधर नहीं सकी हैं। इतना ही नहीं सांसद आदर्श गांवों में संचालित योजनाओं में भ्रष्टाचार भी सामने आ चुका है।
वर्ष 2014 में शुरू हुई सांसद आदर्श ग्राम योजना चार साल बाद भी परवान नहीं चढ़ सका और नियमानुसार हर साल एक गांव का चयन तक नहीं हो सका। जनपद तीन सांसदों से आच्छादित है। इसमें लोकसभा बलिया, घोसी व सलेमपुर के सांसद हैं। वर्ष 2014 में योजना की शुरुआत में सांसद भरत सिंह ने आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के गांव ओझवलिया को गोद लिया और सांसद आदर्श गांव योजना के तहत इसे संवारने का जिम्मा लिया। लेकिन चार साल बाद भी यह गांव अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। एनएच 31 पर बने मुख्य द्वार से गांव को जाने वाली जर्जर सड़क का आज भी मरम्मत नहीं हो सका है। ग्रामीणों ने बताया कि इस मार्ग की मरम्मत पर वर्ष 17-18 में 60 हजार की धनराशि खर्च करने का बोर्ड तो लगाया गया लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं कराया गया। सांसद की ओर से गोद लेने के बाद गांव में कई तरह के विकास कार्य कराए गए, जो आज भी जारी है। लेकिन मूलभूत सुविधाओं का आज भी संकट है। इसके अलावा लाखों की लागत से स्कूल परिसर में रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कारपोरेशन लिमिटेड की ओर से पांच शौचालयों का निर्माण कराया गया जो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया और आज तक इन शौचालयों का प्रयोग नहीं किया जा सका। इसी तरह वर्ष 2014 में ही सलेमपुर के सांसद रवंीद्र कुशवाहा ने कुशहर गांव को गोद लिया। लेकिन यह गांव आज भी संपूर्ण विकास से कोसों दूर है। गांव में 241.53 लाख की लागत से पेयजल परियोजना का काम अब भी पूरा नहीं हो सका है। कुशहर गांव के आठ प्रधानमंत्री आवास की धनराशि को फर्जीवाड़ा कर आहरण कर लिया गया। हालांकि जांच के बाद अधिकारियों ने कार्रवाई की। इसके दो साल बाद बलिया सांसद भरत सिंह ने केहरपुर गांव को 26 दिसंबर 2016 को गोद लिया। सलेमपुर के सांसद रविंद्र कुशवाहा ने 17 अप्रैल 2017 को सरयां गुलाब राय गांव को गोद लिया। दिसंबर 2017 में ही सलेमपुर के सांसद ने सहुलाई गांव को गोद लिया और घोसी के सांसद हरिनारायण राजभर ने 25 दिसंबर 2017 को मिर्जापुर गांव को गोद लिया। लेकिन यह गांव आज भी विकास से कोसों दूर हैं।
इनसेट...
गांव को गोद लेकर विकसित करने का है प्रावधान
बलिया। सांसद आदर्श गांव योजना के तहत प्रत्येक सांसद को हर साल एक गांव को गोद लेकर विकसित करने का प्रावधान था। लेकिन चार सालों में तीन सांसदों से आच्छादित महज छह गांव ही गोद लिए जा सके। योजना में जोर दिया गया था कि गांव को सभी तरह के विकास व लाभार्थी परक योजनाओं से संतृप्त किया जाएगा। इसके अलावा ग्राम पंचायत में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना था। सांसद आदर्श गांव योजना में यह भी प्रावधान किया गया था कि भोज या दावत की मिठाई या खाने को मिड डे मील में बांटा जाएगा और किसानों को ड्रिप इरिगेशन की सुविधा मिलेगी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका है।
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