जननी की सुरक्षा में ‘जिम्मेदार’ बने लापरवाह

Bahraich Updated Fri, 25 Oct 2013 05:39 AM IST
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बहराइच/पयागपुर। पीएचसी पर सुरक्षित प्रसव के बाद महिला घर पहुंची तो अधिक रक्तस्राव के कारण उसकी हालत खराब हो गई। परिवारीजन दोबारा उसे लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे तो चिकित्सकों ने जवाब दे दिया। परिवार के लोग गंभीर हालत में महिला को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आए, यहां कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। विवाहिता दो घंटे तक दर्द से कराहती रही लेकिन कोई नहीं पहुंचा। वार्ड बॉय ने महिला को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। देर रात महिला को इलाज नसीब हुआ, तब जाकर उसकी जान बच सकी।
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मरीजों के प्रति चिकित्सकों की लापरवाही व उदासीनता के नित नए मामले सामने आ रहे हैं। बुधवार सुबह विकासखंड पयागपुर के गांव खुटेहना की ममता (35) पत्नी रमेश को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिवारीजन उसे खुटेहना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। यहां दोपहर एक बजे ममता ने एक पुत्र को जन्म दिया। इसके बाद ममता को घर भेज दिया गया लेकिन शाम छह बजे से ममता को रक्तस्राव शुरू हो गया। झटके आने लगे। परिवार के लोग उसे लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, यहां चिकित्सकों ने जवाब दे दिया। ममता को करीब 9:30 पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। यहां भी कोई चिकित्सक नहीं मिला।
दो घंटे तक अस्पताल में महिला दर्द से कराहती रही लेकिन उसे इलाज नसीब नहीं हुआ। वहां मौजूद वार्डबॉय राणा प्रताप ने हालत बिगड़ती देख उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। रात 11:30 बजे के आसपास परिवारीजन एंबुलेंस से ममता को लेकर जिला महिला अस्पताल पहुंचे। यहां पर डॉक्टर अनुराधा ने इलाज शुरू किया।
तो किसने बनाई डिस्चार्ज स्लिप?
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के वार्ड बॉय राणा प्रताप ने रात में जिला अस्पताल के लिए ममता की डिस्चार्ज स्लिप तैयार की थी। इस पर 108 सेवा के एंबुलेंस चालक ने बिना डॉक्टर से वार्ता के मरीज को ले जाने से इन्कार कर दिया था। परिवारीजनों के काफी निवेदन के बाद एंबुलेंस चालक ममता को लेकर जिला अस्पताल गया था लेकिन प्रभारी चिकित्साधिकारी का कहना है कि वार्ड बॉय ने डिस्चार्ज स्लिप नहीं बनाई। कभी वह एएनएम तो कभी फार्मासिस्ट की ओर से डिस्चार्ज स्लिप बनाने की बात बता रहे हैं।

डॉक्टर पारितोष की थी ड्यूटी
सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधीक्षक डॉ. एनबी जायसवाल का कहना है कि बुधवार शाम को डॉ. पारितोेष की ड्यूटी थी लेकिन वह ट्रेनिंग पर बाहर गए हैं, जिसके चलते अस्पताल में कोई चिकित्सक नहीं मिल सका है। खून की थी काफी कमी
जिला महिला अस्पताल की चिकित्साधीक्षक डॉक्टर सुल्ताना अजीज ने बताया कि ममता को बेहोशी की हालत में देर रात अस्पताल लाया गया था। ममता के शरीर में खून काफी कम था। उन्हाेेंने बताया कि एक यूनिट खून चढ़ाया गया है। इलाज के बाद मरीज की हालत ठीक है। सीएमएस ने बताया कि सुबह 11 बजे के आसपास ममता को उसका पति स्वेच्छा से डिस्चार्ज कराकर घर ले गया है।

जांच कर करेंगे कार्रवाई : सीएमओ
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. उमाकांत वर्मा से जब सीएचसी पयागपुर में मरीज के इलाज में बरती गई कोताही के मामले में बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। जांच करवाएंगे कि आखिर डॉक्टर मौजूद क्यों नहीं था, जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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