भूख से तड़पकर ग्रामीण की मौत

Bahraich Updated Wed, 30 Jan 2013 05:30 AM IST
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महसी (बहराइच)। भूख से तड़पकर मंगलवार की सुबह महसी निवासी एक ग्रामीण ने दम तोड़ दिया। वह प्रतिदिन मजदूरी करके रोटी का इंतजाम करता था लेकिन पखवारे भर से बीमार होने के कारण वह काम पर नहीं जा सका था। मृत मजदूर का ग्राम प्रधान ने चंदा इकट्ठा कर अंतिम संस्कार करवाया। इस मामले में जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी महसी को जांच के आदेश दिए हैं।
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महसी निवासी मिश्रीलाल (50) को 10 वर्ष पूर्व भूमिहीन होने के चलते चार बिस्वा कृषि भूमि का पट्टा मिला था। 2004 में पत्नी रामरती के इलाज के लिए मिश्रीलाल ने 10 हजार रुपये में जमीन गिरवी रख दी थी, पर पत्नी की मौत हो गई। एक बेटी की मौत हो चुकी , जबकि दूसरी बेटी शांति का विवाह हो चुका है। मिश्रीलाल घर में अकेले रहता था। महामाया योजना के तहत मिश्रीलाल के नाम का चयन किया गया था लेकिन वर्ष 2012 में सात जनवरी को सिर्फ योजना की एक किश्त 2400 रुपये ही मिली थी। इस रुपये से उसने ग्रामीणों से लिए गए उधार को चुकता किया। इसके बाद उसे कोई सरकारी लाभ नहीं मिला। न तो राशन कार्ड बना था न ही मनरेगा में उसका चयन हुआ।

प्रतिदिन मजदूरी करके ही वह अपना पेट पालता था। पखवारे भर पूर्व वह बुखार और उल्टी दस्त की चपेट में आ गया, जिसके चलते काम पर नहीं निकल सका। दो दिन पड़ोसियों ने कुछ खाने को दिया लेकिन बीते तीन दिन से उसके पेट को अन्न का एक दाना भी नसीब नहीं हुआ। भूख से तड़पकर मिश्रीलाल ने मंगलवार सुबह दम तोड़ दिया। उसका भाई पन्नालाल भी गांव में ही रहता है। उसकी भी आर्थिक हालत खराब है।
ग्राम प्रधान शफीकुनिशा के पति इसराइल ने बताया कि सुबह काफी देर तक मिश्रीलाल की आहट न मिलने पर पड़ोसी घर गए तो वह मृत मिला। इसराइल ने पड़ोसियों और मृतक के भाई की मदद से घर में पड़ताल कराई तो अनाज का एक दाना भी नहीं मिला। पैसे भी नहीं थे। ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर शव का अंतिम संस्कार कर दिया। पन्नालाल का कहना है कि 10 दिन पूर्व मिश्रीलाल ने आधा किलो चावल मांगा था, जिस पर उसने दे दिया था।
एसडीएम को सौंपी जांच
जिलाधिकारी किंजल सिंह ने कहा कि भूख से ग्रामीण की मौत का मामला जानकारी में आया है। उपजिलाधिकारी महसी घनश्याम त्रिपाठी को जांच सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पोस्टमार्टम न होने से मामला संदिग्ध
उपजिलाधिकारी घनश्याम त्रिपाठी का कहना है कि ग्रामीणों से बातचीत के दौरान उसके अभावग्रस्त होने का पता चला है लेकिन मृतक का पोस्टमार्टम नहीं हुआ है, इसलिए मामला संदिग्ध है। बिना पोस्टमार्टम के भूख से मौत की बात को सही नहीं ठहराया जा सकता। एसडीएम ने कहा कि पारिवारिक लाभ योजना के तहत बेटी को 20 हजार रुपये का चेक प्रदान किए जाने के निर्देश लेखपाल को दिए गए हैं।

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