अधूरी परक्यूपाइन योजना को पूरा करने की कवायद

Bahraich Updated Wed, 19 Dec 2012 05:30 AM IST
बहराइच। बिसवां के पास घाघरा नदी का रुख तटबंध की ओर से मोड़ने के लिए परक्यूपाइन योजना पूरी करने की कवायद फिर कर दी गई है। गौरतलब है कि बाढ़ के कारण कार्य बीच में ही छोड़ दिया गया था। नदी के तट पर परक्यूपाइन लगाने के लिए मंगलवार को अभियंताओं की मौजूदगी में पैमाइश की गई।
महसी के बिसवां के निकट बेलहा-बेहरौली तटबंध से नदी की दूरी महज 100 मीटर के आसपास है। सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम की रिपोर्ट पर शासन ने 6.27 करोड़ रुपये की परक्यूपाइन परियोजना को हरी झंडी दी थी। जुलाई माह में काम शुरू हुआ, तभी बाढ़ की विभीषिका भी शुरू हो गई, जिसके चलते आधा कार्य ही हो सका था। नदी का रुख बेलहा-बेहरौली तटबंध की ओर न मुड़े, इसके लिए अभी से कवायद कर दी गई है। शासन के निर्देश पर बाराबंकी की कंपनी ने पुन: कार्य शुरू किया है। निदेशक एसबी सिंह अभियंताओं के साथ नदी के तट पर मंगलवार को पहुंचे। उन्होंने सरयू ड्रेनेज खंड के अवर अभियंता असलम की मौजूदगी में नदी और तट के बीच परक्यूपाइन लगने वाले स्थान की नाव से पैमाइश की।
क्या है परक्यूपाइन
परक्यूपाइन ऐसी तकनीकि है जिसमें नदी के तट पर सीमेंट के तीन पिलर को आंड़ा तिरछा खड़ा किया जाता है। उसके बीच में बालू की बोरियां नायलान के कैरेट में भरी जाती हैं। इससे टकराकर नदी की धारा का रुख दूसरी ओर मुड़ता है।
लगने हैं 1169 परक्यूपाइन
बिसवां के निकट नदी के तट पर स्पर संख्या तीन से घूरदेवी स्पर तक एक किलोमीटर के दायरे में 1169 परक्यूपाइन लगने थे लेकिन बाढ़ के चलते सिर्फ 431 परक्यूपाइन लगाने का ही कार्य हो सका था।
नहीं हुई कंपनी पर कोई कार्रवाई
शासन के अनुमति पर सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम ने ओसोनिक कंस्ट्रक्शन कंपनी को कार्य का जिम्मा सौंपा था लेकिन बाढ़ के पूर्व कंपनी कार्य पूरा नहीं कर सकी थी। इस मामले में जिला प्रशासन ने भी दो बार चेतावनी दी थी। इसके बावजूद कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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