बाघों की सीजनल गणना का कार्य पूरा

Bahraich Updated Mon, 17 Dec 2012 05:30 AM IST
मिहींपुरवा (बहराइच)। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में मौसम परिवर्तन के दौरान बाघ के मूवमेंट पर नजर रखने के लिए 22 दिन तक थर्मोसेंसर कैमरे से नजर रखी गई। कैमरों के चित्र का अध्ययन करने में बाघ विशेषज्ञ जुटे हुए हैं।
मौसम परिवर्तन के समय जंगल में बाघ और तेंदुओं के मूवमेंट को परखने के लिए पहली बार शीत ऋतु में इस बार 150 थर्मो सेंसर कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों का उद्देश्य जंगल में गर्मी और जाड़े के बीच के मौसम में बाघ और तेंदुओं की जीवनशैली का अध्ययन और उनकी गणना करना था। प्रभागीय वनाधिकारी आरके सिंह ने बताया कि डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से यह पहल की गई है जिसमें वन विभाग ने भी सहयोग किया है। उन्होंने बताया कि 22 नवंबर को कतर्नियाघाट, निशानगाड़ा, धर्मापुर, मोतीपुर और मुर्तिहा क्षेत्र में कैमरे लगाए गए थे। 1.5 वर्ग किलोमीटर के दायरे में दो कैमरे सेट किए गए थे। इन कैमरों से 15 दिसंबर तक बाघ और तेंदुओं के मूवमेंट पर नजर रखते हुए उनकी गणना की गई है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के बाघ विशेषज्ञ प्रणव चंचलानी और भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून की शोध छात्रा रेखा और श्वेता की भी कैमरों से मिले चित्र का अध्ययन कर रही हैं। जंगल से सभी कैमरे निकालने के बाद उसकी सीडी बनाकर भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून को भी भेजी जाएगी। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी दबीर हसन ने बताया कि यह सीजनल गणना और वन्यजीवों के मूवमेंट पर नजर रखने की कार्ययोजना थी। दो माह में रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी।
गायब हुए 10 थर्मोसेंसर कैमरे
जंगल में वन्य जीवों की गणना के लिए लगाए गए 10 थर्मोसेंसर कैमरे गणना अवधि में गायब हुए हैं। इसकी तहरीर वन विभाग की ओर से क्षेत्र के थानों में दी गई है। लेकिन सिर्फ मुर्तिहा क्षेत्र से गायब हुए दो कैमरों की रिपोर्ट ही दर्ज हुई है।

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