वन्य और जलीय जीवों पर आफत

Bahraich Updated Thu, 13 Dec 2012 05:30 AM IST
बहराइच। जिले के वन्य जीवों पर बुधवार का दिन भारी गुजरा। नानपारा-लखीमपुर मार्ग पर कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के मोतीपुर रेंज में नैनिहा के पास बुधवार तड़के एक नर व मादा फिशिंग कैट को अज्ञात वाहन ने रौंद दिया। उधर, संरक्षित वन क्षेत्र के गिरिजापुरी गेट संख्या 15 में बुधवार सुबह एक घड़ियाल का शव फंसा मिला। वन कर्मियों ने शव को निकाला। एक नीलगाय को जंगल में तेंदुए ने मार डाला। वहीं, महसी में राष्ट्रीय पक्षी मोर का शव खेत में मिला है। फिशिंग कैट, नीलगाय और घड़ियाल के शवों के पोस्टमार्टम के लिए डॉक्टरों की टीम गठित की गई है।
वाहन से कुचलीं नर व मादा फिशिंग कैट
उर्रा। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में मोतीपुर रेंज के वन रक्षक रामकृपाल सुबह गश्त कर रहे थे। इसी दौरान जंगल से 300 मीटर की दूरी पर नानपारा-लखीमपुर मार्ग पर नैनिहा के पास दो वन्यजीव सड़क पर मृत मिले। वन्यजीवों का आकार तेंदुए की तरह लग रहा था। इस पर वन रक्षक ने रेंज कार्यालय को तेंदुओं की मौत होने की खबर दे दी। वन क्षेत्राधिकारी जेके वर्मा मौके पर पहुंचे लेकिन वह भी मृत वन्यजीवों की पहचान नहीं कर सके। उन्होंने दो तेंदुओं के शावकों के मौत की पुष्टि की। इसके बाद विभाग में हड़कंप मचा। उप प्रभागीय वनाधिकारी सुभाष चंद्रा व डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी दबीर हसन मौके पर पहुंचे। इन दोनों अधिकारियों ने मृत वन्यजीवों की पहचान फिशिंग कैट के रूप में की। दोनों शवों को रेंज कार्यालय लाया गया है। अज्ञात भारी वाहन से कुचलकर मौत होने की बात वनाधिकारी बता रहे हैं।
तेंदुए के शावकों की तरह होते ये जीव
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी दबीर हसन ने बताया कि तेंदुए के शावक की तरह ही वयस्क फिशिंग कैट भी होती है। उन्होंने कहा कि तेंदुए का कलर हल्का पीला होता है, उस पर काले धब्बे होते हैं, जबकि फिशिंग कैट का कलर स्लेटी होता है। शरीर पर धब्बे की जगह तीन धारियां होती हैं।
इस क्षेत्र में मिलतीं फिशिंग कैट
परियोजनाधिकारी ने बताया कि फिशिंग कैट कतर्नियाघाट, निशानगाड़ा और मोतीपुर रेंज में बहुतायत में पाई जाती हैं। जिस जगह पर घना जंगल और पानी का क्षेत्र होता है, वहां इनकी मौजूदगी होती है। झील, तालाब और नदियों में यह मछलियों का शिकार करते हैं। उन्होंने कहा कि जहां पर फिशिंग कैट की मौत हुई है, उस जगह पर 50 मीटर की दूरी पर एक नाला बहता है, घना जंगल भी है।
तेंदुए ने किया नीलगाय का शिकार
कतर्नियाघाट रेंज के विशुनपुर टांड़ा गांव के निकट एक नीलगाय का शव बुधवार सुबह बरामद हुआ। वन विभाग के मुताबिक तेंदुए के हमलें में नीलगाय की मौत हुई है। हालांकि, आसपास गांव के लोगों ने संदिग्धता जतायी है। इस पर वन क्षेत्राधिकारी ने नीलगाय के शव को पोस्टमार्टम के लिए रेंज कार्यालय भेजा है। वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
खेत में मृत मिला राष्ट्रीय पक्षी
महसी। हरदी थाना क्षेत्र के बहोरिकपुर के तिवारीपुरवा गांव में एक राष्ट्रीय पक्षी मृत हालत में वेदप्रकाश पुत्र मेड़ई के खेत में मिला। गांव निवासी विक्रांत ने इसकी सूचना पुलिस अधीक्षक को दी। एसपी के निर्देश पर थानाध्यक्ष कपिलमुनि सिंह ने मौके पर पहुंचकर ग्राम प्रधान की मौजूदगी में शव का अंतिम संस्कार करवा दिया है। मोर की मौत कैसे हुई, इसका पता नहीं चल सका है।
मछुवारों की सहायता से निकाला गया घड़ियाल का शव
बिछिया। कतर्नियाघाट रेंज में स्थित चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज के गेट संख्या 15 पर बुधवार की सुबह कुछ लोगों ने घड़ियाल का शव उताराता देखा। सूचना पाकर वन क्षेत्राधिकारी वसी इकबाल नकवी, डिप्टी रेंज इरफान खां, वन रक्षक जमुना प्रसाद पहुंचे। मौके पर मौजूद मछुवारा पुड़ी पुत्र राममिलन ने अपने 6 सहयोगियों की सहायता से घड़ियाल के शव को बाहर निकाला। वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि घड़ियाल मादा है। ऐसा लगता है कि बैराज के फाटक में फंसकर उसकी मौत हुई होगी। हालांकि, पोस्टमार्टम के बाद ही मौत के कारणों का पता चल सकेगा। घड़ियाल के शव को रेंज कार्यालय ले जाया गया है।
तीन डॉक्टरों का पैनल गठित
उप प्रभागीय वनाधिकारी सुभाष चंद्रा ने बताया कि फिशिंग कैट, नीलगाय और घड़ियाल के मौत के मामले में कैसरगंज के उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरके सक्सेना, मिहींपुरवा के डॉ. राजुल सक्सेना व सुजौली के डॉ. अनूप कुमार की मौजूदगी में डॉक्टरों का पैनल गठित हुआ है। तीनों डॉक्टरों की मौजूदगी में वन्यजीवों का पोस्टमार्टम करने के बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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