रजिस्ट्रार कार्यालय से दाखिल खारिज की 289 फाइलें गायब

Bahraich Updated Wed, 12 Dec 2012 05:30 AM IST
महसी (बहराइच)। तहसील के रजिस्ट्रार कार्यालय में वर्ष 2009 व 10 में हुए जमीनों के दाखिल खारिज की 289 फाइलें गायब हैं। इसका खुलासा जमीन का बैनामा कराने आए ग्रामीणों द्वारा फाइल में लगे कागजात की नकल की अर्जी प्रस्तुत करने पर हुआ। इसके बाद से हड़कंप मचा है। नायब तहसीलदार को मामले की जांच सौंपी गई है। फाइलों के गायब होने के मामले में तत्कालीन रजिस्ट्रार कानूनगो की संलिप्तता मानी जा रही है। हालांकि, इसका खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा। बड़ी संख्या में फाइलों के गायब होने से विभागीय अधिकारी सकते में हैं। किसान भी परेशान हैं।
तहसील में जब कोई व्यक्ति अपनी जमीन का बैनामा और दाखिल खारिज करवाता है तो उसकी फाइल तैयार होती है। यह फाइल सुरक्षित रखी जाती है क्योंकि इसी आधार पर जमीन का मालिकाना हक तय होता है। लेकिन, वर्ष 2009-10 में महसी तहसील के तेजवापुर, जैतापुर तथा महसी नायब तहसीलदार पटल के द्वारा लगभग साढ़े तीन हजार लोगों की जमीन का बैनामा और दाखिल खारिज किया गया। इनमें कुछ जमीनें विवादित थीं, जिसके चलते बैनामा और दाखिल खारिज के बाद उनमें मुकदमे भी दर्ज हुए।
कुछ जमीनों में पैमाइश की अड़चन थी। इसका भी मामला अलग-अलग नायब तहसीलदार के न्यायालय पर चल रहा है। जमीनों के जो दाखिल-खारिज हुए, उनमें से 289 फाइलें
गायब हैं। इस कारण न तो किसानों को खसरा खतौनी की नकल मिल पा रही है, न ही जमीन के मामले में तहसील न्यायालय में दायर वादों की सुनवाई हो पा रही है। उच्चाधिकारियों को मामले से अवगत कराने के बाद तहसीलदार ने गायब फाइलों के मामले में जांच शुरू करवाई है। नायब तहसीलदार डॉ. उमाशंकर त्रिपाठी को जांच अधिकारी बनाया गया है।
रोकी गई तत्कालीन रजिस्ट्रार कानूनगो की पेंशन
तहसीलदार हरिश्चंद्र ने बताया कि तत्कालीन रजिस्ट्रार कानूनगो शिवकुमार श्रीवास्तव वर्ष 2010 में सेवानिवृत्त हुए हैं। मामला उन्हीं के समय का है, ऐसे में संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता है। तत्काल प्रभाव से उनकी पेंशन रोक दी गई है। जांच पूरी होने के बाद ही रिपोर्ट के आधार पर पेंशन बहाल की जाएगी।
प्रभारी रजिस्ट्रार कानूनगो ने लेने से इनकार किया चिट्ठा
तहसीलदार ने बताया कि फाइलों के गायब होने का मामला संज्ञान में आने के बाद शिवकुमार श्रीवास्तव से संपर्क साधा गया तो उन्होंने गायब फाइलों का चिट्ठा तैयार कर प्रभारी रजिस्ट्रार कानूनगो सुभाष पांडेय को देने का प्रयास किया लेकिन उस चिट्ठे की जांच करने पर पता चला कि उसमें सभी गायब 289 फाइलों का भी हवाला है। जिसके चलते चिट्ठा नहीं लिया गया। इस बिंदु को भी जांच में शामिल किया गया है।
किस विभ्‍ााग की थी 123 फाइलें?
वर्ष 2011 में महसी तहसील के गोदाम से निकाले गए दरी में 123 फाइलें लिपटी पाई गईं थीं। काफी हो हल्ला मचा था लेकिन तत्कालीन एसडीएम ने जांच कराने की बात कहते हुए किनारा कस लिया था। जिसके चलते वह फाइलें किस विभाग की थीं, इसका पता नहीं चल सका था। कहीं दरे में लिपटीं मिलीं फाइलें 289 फाइलों में ही शामिल नहीं थीं, यह सवाल भी उठ रहा है।

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