आशाओं की छतरी में समाएगा सेहत का आसमां

Bahraich Updated Wed, 05 Dec 2012 05:30 AM IST
बहराइच। धूप, छांव या हो बरसात, अब हर आशा कार्यकर्त्रियां छाता लगाकर चलेंगी। यह छतरी आशा कार्यकर्त्रियों की न सिर्फ पहचान होगी, बल्कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन जागरूकता का संदेश भी छाते के माध्यम से गांव-गांव में फैलेगा। इस छतरी के माध्यम से आशा कार्यकर्त्रियां लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक व प्रोत्साहित करेंगी। साथ ही, उन्हें एक परिचय पत्र भी दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग इस योजना को अमली जामा पहनाने में जुट गया।
आशा कार्यकर्त्रियां राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना की एक घटक हैं। उत्तर प्रदेश में शिशुआें की बढ़ती मृत्यु दर को देखते हुए आशा कार्यकर्त्रियों को नवजात शिशुओं की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसा कहा गया है कि नवजात के पैदा होने के एक महीने बाद तक आशा कार्यकर्त्रियां देखभाल करेंगी। प्रशिक्षित महिलाएं गांवों में जाकर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करती हैं। इसी के तहत महिलाओं में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं व अन्य स्वास्थ्य देखभाल संबंधी कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए शासन ने अब दो रंगों का कलरफुल छाता देने की कवायद की है। शासन की ओर से जिले में पंजीकृत 2202 आशा कार्यकर्त्रियोें में से 90 प्रतिशत आशाओं को छतरी मुहैय्या कराने की हरी झंडी दिखाई गई है। 1980 आशाओं को छाता दिया जाएगा।
दो रंगों का होगा छाता
एनआरएचएम योजना के तहत आशा कार्यकत्रियों को दिया जाने वाला छाता दो रंग का होगा। हालांकि रंगों का चयन अभी नहीं हो सका है। यह विभाग को ही निर्धारित करना है। छाते पर दो रंगों की पट्टियां होंगी और उस पर स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता के स्लोगन लिखे होंगे। आशाओं को क्षेत्र में जाते समय छतरी लगाना जरूरी होगा।
मिलेगा पहचान पत्र
अब आशा कार्यकर्त्रियां किसी पहचान की मोहताज नहीं होंगी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आशाओं को एक परिचय पत्र दिया जाएगा। परिचय पत्र पर आशाओं के नाम, फोटो, क्षेत्र का नाम, गांव का नाम व मोबाइल नंबर अंकित होंगे।
टेंडर निकालकर खरीदे जाएंगे छाते
स्वास्थ्य एवं सूचना अधिकारी दाउद अहमद ने बताया कि शासन ने छाता की खरीददारी करने के लिए टेंडर निकालने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए विभाग कार्ययोजना तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि छतरी की गुणवत्ता परखी जाएगी, उसके बाद ही छाता लिया जाएगा।
शीघ्र होगी कार्रवाई
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके टंडन बताते हैं कि तराई में शिशु मृत्यु दर को कम करने में आशा कार्यकर्त्रियां अहम भूमिका निभा रही हैं। शासन ने आशाओं को छतरी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। शीघ्र ही इस संबंध में कार्रवाई शुरू होगी।

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