दिमागी बुखार से चार महीनों में 174 की मौत

Bahraich Updated Wed, 07 Nov 2012 12:00 PM IST
बहराइच। दिमागी बुखार पर अंकुश के लिए स्वास्थ्य महकमा तरह-तरह के दावे भले ही कर रहा हो लेकिन जुलाई से अब तक इस रोग से 174 रोगियों की सांसें थमी हैं। महकमा अंकुश नहीं लगा पा रहा है। दिमागी बुखार तराई में महामारी की शक्ल अख्तियार कर चुका है। प्रतिदिन औसतन दो की जान जा रही है लेकिन अस्पताल प्रशासन हालत बिगड़ने पर रोगी को लाने की बात कहकर किनारा कस रहा है जिसके चलते मौतों का ग्राफ निरंतर बढ़ता जा रहा है।
तराई क्षेत्र में मौसम तेजी से बदल रहा है। दिन में जहां धूप रहती हैं, वहीं रात का तापमान काफी कम दर्ज हो रहा है। इससे लोग संक्रामक बीमारियों के शिंकजे में तो आ ही रहे हैं। दिमागी बुखार भी पीछा नहीं छोड़ रहा है। स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी ही बताते हैं कि ठंडक शुरू होने पर दिमागी बुखार थम जाता है लेकिन तराई में ठंड की आहट के बावजूद अब तक इसका प्रकोप थमा नहीं है। हालात यह हैं कि जिला अस्पताल में प्रतिदिन सुबह शाम दिमागी बुखार के रोगी की हालत बिगड़ने पर परिजनों की चीख पुकार सुनाई देती है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरके टंडन का कहना है कि रोस्टर के मुताबिक फॉगिंग करवाई गयी है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि अगर फॉगिंग हुई है तो मच्छरों पर अंकुश क्यों नहीं लगा है। मौतों पर कब ब्रेक लगेगा, यह सवाल सभी को साल रहा है।
गोरखपुर की कार्यशाला में बनेगी रणनीति ः प्रभारी सीएमओ
प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आर के टंडन का कहना है कि जिले का मिहीपुरवा, नवाबगंज, बलहा और महसी क्षेत्र दिमागी बुखार प्रभावित है। यहां पर एंटीलार्वा का छिड़काव और फॉगिंग निरंतर कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह गोरखपुर मेडिकल कालेज में दिमागी बुखार नियंत्रण के लिए कार्यशाला होगी जिसमें बहराइच में हो रही मौतों का मामला रखा जाएगा। वहां विशेषज्ञ जो रणनीति बनाएंगे उसका क्रियान्वयन बहराइच में कराकर बुखार पर शिकंजा कसा जाएगा। फिलहाल आने वाले रोगियों का हर संभव इलाज किया जा रहा है।

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