साइबेरियन मेहमानों के कलरव से गूंजने लगे झील-तालाब

Bahraich Updated Thu, 01 Nov 2012 12:00 PM IST
बहराइच। तराई में ठंड की आहट के साथ ही साइबेरियन मेहमानों की भी आमद शुरू हो गई है। नेपाल सीमा से सटे कतर्नियाघाट के गेरुआ नदी व जंगल के मध्य स्थापित झीलों में विदेशी मेहमानों के कलरव की गूंज सुनाई देने लगी है। इसके अलावा जिले के अन्य झील और तालाब भी साइबेरियन मेहमानों की आमद से गुलजार होने लगे हैं। फरवरी माह तक यह साइबेरियन मेहमान प्रवास करेंगे।
तराई की आबोहवा साइबेरियन मेहमानों के लिए काफी बेहतर मानी जाती है। ठंड की शुरुआत होते ही साइबेरियन मेहमान तराई में दस्तक देते हैं। प्रतिवर्ष अक्तूबर माह के अंत में साइबेरियन मेहमानों की आमद शुरू हो जाती है। नवंबर माह से फरवरी तक साइबेरियन पक्षी हिमालय की तराई में बसे क्षेत्र के सीमावर्ती तालाब और झीलों में प्रवास करते हैं। सबसे अधिक साइबेरियन पक्षी बहराइच के कतर्नियाघाट से होकर बहने वाली नदियों, नहरों व जंगल के निकट स्थित झीलों में समय बिताते हैं। गर्मी की शुरुआत होते ही यह साइबेरियन पक्षी पुन: हिमालय पारकर अपने वतन लौट जाते हैं। चार महीने का यह प्रवासकाल तराई के वातावरण को काफी खुशनुमा बनाता है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के प्रभागीय वनाधिकारी आरके सिंह ने बताया कि कतर्नियाघाट रेंज के कतर्नियाघाट व कोठियाघाट में इक्का दुक्का साइबेरियन पक्षियों की आमद शुरू हो गई है। कलरव की गूंज सुनाई पड़ने लगी है। उन्होंने कहा कि नवंबर माह के अंत तक बड़े पैमाने पर साइबेरियन मेहमानों की आमद से नदी और जंगल के तालाब गुलजार हो जाएंगे।
यहां प्रवास करते हैं पक्षी
कतर्नियाघाट के माहादेवा ताल झील, सेंट्रल स्टेट फार्म, लठौवा-कठौवा ताल झील, धर्मापुर झील, गायघाट स्थित सरयू तट, मजरा डैम, गिरिजापुरी बैराज, गेरुआ नदी के कतर्नियाघाट व कोठियाघाट, चित्तौरा झील, पयागपुर का बघैल ताल झील।
हिमालय पार कर आती हैं 25 प्रजातियां
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी दबीर हसन ने बताया कि साइबेरियन देशों के अलावा चीन व अन्य ठंडे देशों से 25 प्रजातियों के पक्षी भारतीय क्षेत्रों में चार माह तक प्रवास करते हैं। इनमें लालसर, नीलसर, ब्राह्मीडक, सुरखाब, पिनटेन, फिशलिंग टिल्स, कामनकूट पक्षी लोगों के आकर्षण का केंद्र होते हैं।
शिकारियों की भी होती नजर
चार माह के प्रवास पर आने वाले साइबेरियन पक्षियों पर शिकारियों की भी नजर होती है। बड़े पैमाने पर शिकार होता है। इस मामले में डीएफओ आरके सिंह का कहना है कि कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में स्थित तालाब, झील व नदियों में प्रवास करने वाले पक्षियों की सुरक्षा के लिए सभी रेंजों के वन दरोगा व वन रक्षकों को अलर्ट कर दिया गया है।

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