किसानों के अरमानों पर ओलावृष्टि

Bahraich Updated Thu, 18 Oct 2012 12:00 PM IST
बहराइच। जिले का मौसम मंगलवार की रात अचानक बदल गया। गरज-चमक के साथ दक्षिणी व पश्चिमी क्षेत्र में भारी वर्षा हुई। तेज हवा के साथ ओले भी गिरे। बड़े पैमाने पर किसानों की धान की फसल बर्बाद हुई है। इससे उनके अरमानों पर पानी फिर गया है। अचानक बदले मौसम का कारण मौसम वैज्ञानिक लोकल विक्षोभ बता रहे हैं।
मंगलवार को दिन में मौसम सामान्य था। हल्की पुरवा हवा दिन में सिहरन का एहसास करा रही थी लेकिन देर रात मौसम ने करवट ली। रात करीब 11 बजे बादल छा गए और तेज हवा चलने लगी। गरज-चमक शुरू हो गई। महसी और नानपारा तहसील क्षेत्र में ही बादल जमकर बरसे। वर्षा के पूर्व 10 से 25 ग्राम तक के ओले 15 मिनट तक गिरे। इसके बाद रात एक बजे तक रुक-रुककर बारिश होती रही। महसी के बौंडी-बिसवां, जैतापुर, घूरदेवी, छत्तरपुरवा बांसगढ़ी, सिकंदरपुर, सिसैया, खैरीघाट व शिवपुर क्षेत्रों में जमकर पानी बरसा। नानपारा तहसील के जंगल के किनारे स्थित गांवों में भी बादल बरसे। इस दौरान तापमान लुढ़ककर 16.5 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया। जिले के दक्षिणी-पश्चिमी क्षेत्र के किसानों की धान व गन्ने की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। किसान बेहाल हैं। जिले के अन्य हिस्सों में सिर्फ बूंदाबांदी ही हुई।
17 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड
फसल अनुसंधान केंद्र के मौसम विभाग के तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. आर.के श्रीवास्तव ने कहा कि सप्ताह भर से दिन में तेज धूप व रात में तापमान में गिरावट के साथ ही दो दिनों से हल्की पुरवा हवा चल रही थी। इस कारण लोकल विक्षोभ की स्थिति उत्पन्न हुई। दक्षिणी क्षेत्र में महसी और कैसरगंज का आंशिक क्षेत्र वर्षा व ओलावृष्टि की चपेट में आया है। जबकि पश्चिम में नानपारा तहसील क्षेत्र का विकासखंड काफी प्रभावित हुआ है। दोनों क्षेत्रों में 17 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड हुई है। औसत 25 ग्राम वजन के आसपास ओले गिरे हैं।
सूखने पर तत्काल काटें फसल
कृषि वैज्ञानिक डॉ. आर.के श्रीवास्तव का कहना है कि वर्षा व ओलावृष्टि के चलते धान व गन्ने की जो फसल खेतों में गिर गई है, उसे खेतों का पानी सूखने पर तत्काल काट लें तो कुछ हद तक किसान नुकसान से बच सकते हैं।
भगवान से सुख देखा नाइ जात
फकीरपुरी निवासी रामजस का कहना है कि कुछ फसल हाथी रौंद दिहिस रहै। जौन बची रही ऊ भगवान लै गे। अब परिवार का खाई समझ नाई पाइत है। कुछ यही पीड़ा है भवानीपुर निवासी राजाराम व कारीकोट निवासी जगजीवन की। किसानों का कहना है कि धान की फसल तैयार होने पर सोचा था दीवाली में परिवार के लिए गर्म कपड़े का इंतजाम किया जाएगा। लेकिन पूरी फसल खेत में गिरकर चौपट हो गई है।
मिहींपुरवा में प्रभावित हुए ये गांव
कारीकोट, फकीरपुरी, आंबा, बर्दिया, बिशुनापुर, भवानीपुर, चहेलवा, मटेही, सुजौली, बाजपुर बनकटी, जंगल गुलरिहा समेत अन्य।
21 तक साफ रहेगा मौसम
फसल अनुसंधान केंद्र के मौसम विभाग के मुताबिक 21 अक्तूबर तक वर्षा की कोई संभावना नहीं है। मौसम साफ रहेगा। इसके बाद बदली का सामना जिले के लोगों को करना पड़ सकता है।

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