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महसी के गांव बचाने को 25 करोड़ का प्रस्ताव

Bahraich Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
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d अमर उजाला ब्यूरो
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बहराइच। महसी के 30 गांव घाघरा नदी के निशाने पर हैं। इन गांवों को नदी की लहरों से बचाने के लिए सरयू ड्रेनेज खंड ने 25 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया है। लखीमपुर जिले के धौरहरा की तर्ज पर नदी के तट पर दो किलोमीटर के दायरे में कटर व लांचिंग अपरन बनाया जाएगा। इसकी कार्य योजना विभाग ने शासन को भेज दी है। हरी झंडी मिलने का इंतजार किया जा रहा है।
महसी तहसील के लोग सात दशक से घाघरा नदी की विभीषिका का सामना कर रहे हैं। तहसील के लोगों को बाढ़ की विभीषिका से बचाने के लिए 60 के दशक में 95 किलोमीटर लंबे बेलहा-बेहरौली तटबंध का निर्माण किया गया था। उस समय तटबंध व घाघरा नदी के बीच की दूरी 18 से 20 किलोमीटर के आसपास थी। लेकिन समय बीतने के साथ ही घाघरा की कटान का दायरा बढ़ता गया। प्रति वर्ष गांव के गांव नदी में समाते चले गए। इस समय नदी की दूरी तटबंध से कई स्थानों पर 150 मीटर से 3 किलोमीटर के बीच बची है। इस दायरे में लगभग 30 गांव है। कटान के चलते इन गांवों के आस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। इसके चलते ग्रामीणों ने कई बार गांवों को बचाने के लिए आवाज उठाई और धरना-प्रदर्शन हुए। लखीमपुर के धौरहरा में शारदा नदी की कटान रोकने की तर्ज पर बनी योजना को अमल में लाने की मांग क्षेत्र के लोग कर रहे थे। काफी देर से ही सही अब सरयू बाढ़ खंड सजग हुआ है। नदी और तटबंध के बीच बसे गांवों को बचाने के लिए लखीमपुर की तरह कार्य योजना तैयार की है। सरयू बाढ़ खंड फैजाबाद के निर्देश पर सरयू ड्रेनेज खंड के सहायक अभियंता अब्दुल मुनाफ और आरकेे श्रीवास्तव ने 10 दिन तक क्षेत्र का अध्ययन करने के बाद 25 करोड़ की कार्य योजना बनाई है। यह कार्य योजना आपदा राहत विभाग के साथ शासन को भेजी गई है। शासन से हरी झंडी मिलते ही परियोजना पर कार्य शुरू हो जाएगा।

सितंबर में किया था लखीमपुर का दौरा
सहायक अभियंता आरके श्रीवास्तव ने सितंबर के अंतिम सप्ताह में लखीमपुर के घौरहरा क्षेत्र का दौरा कर वहां पर शारदा नदी की कटान को रोकने के लिए अमल में लाई गई परियोजना का अध्ययन किया था। उसी तरह की परियोजना से घाघरा की लहरों को भी रोकने की कवायद की जाएगी।
ये गांव निशाने पर
घूरदेवी, बिसवां, नई बस्ती, नौबस्ता, छत्तरपुरवा, जोगलापुरवा, बेहटा, तारापुरवा, रानीबाग, धरमापुर, प्रहलादपुरवा, चुन्नीलालपुरवा, घरीराडीह, मथुरापुरवा, कायमपुर, पिपरी, पिपरा, कोढ़वा, धनौली, तिकुरी, पिपरिया, चुरईपुरवा, पचदेवरी, धनावा, नयापुरवा, मैकूपुरवा, मांझा, बहदुरिया, विद्यापुरवा।
परियोजना में यह होगा कार्य
सहायक अभियंता अब्दुल मुनाफ व आरके श्रीवास्तव ने बताया कि पिपरिया से खरखट्टनपुरवा के बीच दो किलोमीटर की दूरी तक जमीन की सतह से नदी की तलहटी तक बोल्डर पिचिंग का कार्य होगा। इसके अलावा नदी की धारा का रुख मोड़ने के लिए दो किलोमीटर तक परक्यूपाइन लगाए जाएंगे। परक्यूपाइन के बीच नायलान कैरेट में बालू की बोरियां डाली जाएंगी। बोल्डर की सहायता से 25 कटर भी अलग-अलग स्थानों पर बनेंगे।
दिसंबर के अंत तक मिल सकती हरी झंडी
सरयू परियोजना के अधीक्षण अभियंता आरसी त्रिपाठी का कहना है कि नदी और तटबंध के बीच गांवों को बचाने के लिए कार्य योजना बनाने को माह भर पूर्व ही तैयारी कर ली गई थी लेकिन बाढ़ के चलते दिक्कत आ रही थी। बाढ़ खत्म होने के बाद कार्य योजना बनाकर शासन को भेजा गया है। आपदा राहत विभाग को भी एक कापी गई है। बजट की स्वीकृति होते ही काम शुरू करवा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दिसंबर तक बजट को हरी झंडी मिलने की उम्मीद है।

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