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कोटेदार बने रहने के लिए पत्नी को दिया तलाक!

Bahraich Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
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बहराइच। कोटेदार बने रहने के लिए एक व्यक्ति ने पत्नी को तलाक देने का षड्यंत्र रच डाला। जबकि जून में हुए निकाय चुनाव में पत्नी के नामांकन पत्र में कोटेदार का नाम पति के रूप में दर्ज है। हालांकि, कोटेदार ने सात वर्ष पूर्व अपनी पत्नी को तलाक देने का शपथ पत्र जिला पूर्ति कार्यालय में दाखिल किया है। इस मामले में जिलाधिकारी के निर्देश पर डीएसओ ने जांच शुरू कर दी है।
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शहर के मोहल्ला काजीपुरा दक्षिणी के कोटे की दुकान मोहल्ला निवासी अफसर महफूज अली पुत्र मकसूद अली के नाम से आवंटित है। नियम है कि अगर किसी व्यक्ति के परिवार का कोई भी सदस्य सभासद या अध्यक्ष पद का चुनाव जीतता है तो उसे कोटे की दुकान छोड़नी पड़ती है लेकिन दुकान का आवंटन बरकरार रहे। इसके लिए महफूज ने तलाक का खेल खेला है। मोहल्ला निवासी मनशाद अहमद ने 16 जुलाई को जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर कहा था कि अफसर महफूज की पत्नी निकाय चुनाव के दौरान सभासद के पद पर निर्वाचित हुई हैं। ऐसे में कोटे की दुकान का अनुबंध समाप्त किया जाए। इस पर जिलाधिकारी किंजल सिंह ने जिला पूर्ति अधिकारी को जांच सौंपी है।
डीएसओ वीआर अहिरवार ने जांच के लिए पूर्ति निरीक्षक सुरेश सिंह व अनिल कुमार की संयुक्त जांच कमेटी बनाई है। मनशाद की ओर से प्रस्तुत किए गए आरोप पत्र के परिप्रेक्ष्य में कोटेदार अफसर ने पूर्ति विभाग को वर्ष 2005 के एक शपथ पत्र की छायाप्रति दी है। छायाप्रति में उसने पत्नी हसीना महफूज को तलाक देने का ब्यौरा दिखाया है। लेकिन हाल ही में जो निकाय चुनाव हुए हैं, उसमें 12 जून को निर्वाचन कार्यालय में दाखिल नामांकन पत्र में सभासद हसीना महफूज के पति के रूप में अफसर महफूज का ही नाम दर्ज है। ऐसे में तलाक देने के बावजूद नामांकन पत्र में हसीना ने पति के रूप में अफसर का नाम कैसे दर्ज किया और अगर असफर, हसीना का पति है तो उसका कोटे का अनुबंध क्यों नहीं समाप्त किया गया? यह सवाल सभी को साल रहा है।
चल रही जांच, शीघ्र होगा निर्णय
जिला पूर्ति अधिकारी वीएस अहिरवार का कहना है कि पूर्ति निरीक्षक की दो सदस्यीय टीम जांच कर रही है। शीघ्र ही इस मामले में निर्णय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर सभासद या अध्यक्ष पद पर चुनाव जीतने वाले व्यक्ति के परिवार का कोई भी सदस्य कोटेदार नहीं हो सकता।
हसीना मेरी पत्नी नहीं दे चुका हूं तलाक
कोटेदार अफसर महफूज से जब कोटे को लेकर हुई शिकायत व चल रही जांच के मामले में बात की गई तो उसने कहा कि वह हसीना को दो मई वर्ष 2005 में तलाक दे चुके हैं। फिर हसीना के नामांकन पत्र में अफसर का नाम क्यों दर्ज है, इसकी जानकारी नहीं है।
पत्नी से बात कराने पर तिलमिला उठा कोटेदार
सूत्रों के अनुसार सभासद हसीना कोटेदार अफसर महफूज के साथ उसी घर में रहती है। शनिवार को जब संवाददाता कोटेदार के घर पहुंचे और सभासद पत्नी से बात कराने को कहा तो वह तिलमिला उठा। झल्लाकर कोटेदार ने कहा कि हसीना मेरी पत्नी नहीं है। उससे मेरा कोई मतलब नहीं। संवाददाता द्वारा नामांकन पत्र में कोटेदार का पति के रूप में दर्ज नाम पर उसने कहा कि अधिकारी आएंगे तो जवाब दे दूंगा। मैं सबसे निपट लूंगा।
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