ताकि हरी-भरी बनी रहे तराई

Bahraich Updated Wed, 10 Oct 2012 12:00 PM IST
बहराइच। तराई की हरियाली को माफिया की नजर लग गई है। विभाग की तमाम कोशिशों के बावजूद कटान पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। अब इसे रोकने के लिए विशेष परियोजना बनाई जाएगी। मुख्य वन संरक्षक मध्य की अगुवाई में टीम मंगलवार को बहराइच पहुंची। यह टीम तीन दिन तक जंगल में कैंप कर मुख्यमंत्री को प्रस्ताव भेजेगी। हरी झंडी मिलते ही परियोजना शुरू हो जाएगी।
जिले के पश्चिमी हिस्से में कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र स्थित है। जबकि आरक्षित वन क्षेत्र भी नेपाल सीमा से सटा हुआ है। नेपाल की खुली सीमा का लाभ उठाकर आए दिन माफिया हरे पेड़ों पर आरा चला रहे हैं। तराई में हरियाली की सुरक्षा के लिए बीते पखवारे मुख्यमंत्री ने ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए थे। उसी के तहत मंगलवार को मुख्य वन संरक्षक मध्य क्षेत्र लखनऊ मनोज सिन्हा, देवीपाटन मंडल के वन संरक्षक महेंद्र सिंह के साथ बहराइच पहुंचे। दोपहर में बहराइच वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. बीसी ब्रह्मा के साथ आरक्षित वन क्षेत्र की स्थिति जांचने के लिए अब्दुल्लागंज-रुपईडीहा रेंज के लिए रवाना हुए।
डीएफओ डॉ. ब्रह्मा ने बताया कि मुख्य वन संरक्षक गुरुवार तक जिले में कैंप कर कैसरगंज, हुजूरपुर, महसी, नानपारा समेत नेपाल सीमा से सटे आरक्षित वन क्षेत्रों का भ्रमण करेंगे।
वनों की सुरक्षा पर खर्च होंगे 10 करोड़ रुपये
प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि वनों की सुरक्षा पर दस करोड़ खर्च होंगे। प्रस्ताव के अनुरूप तराई बेल्ट के जिलों को धन का आवंटन होगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने 10 करोड़ की राशि आरक्षित वन क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए तय की है।
सुरक्षा के नए मानक पर भी होगा विचार
डीएफओ ने कहा कि वनों की सुरक्षा जिस तरीके से इस समय हो रही है, उसके अलावा सुरक्षा के अन्य नए मानकों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। इसका भी प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। तीन दिन बाद ही प्रस्ताव की रूपरेखा स्पष्ट की जा सकेगी।

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