तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है...

Bahraich Updated Wed, 26 Sep 2012 12:00 PM IST
बहराइच। ‘तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है मगर ये आंकड़े झूठे हैं, ये दावा किताबी है।’ जिले में रोगों से होती मौंतें और स्वास्थ्य विभाग के बेहतर सुविधाओं के मजबूत दावे। अंदम गोंडवी की पंक्तियां जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। जहां एक तरह हर रोज जिंदगियां रोगों की बलि चढ़ रही हैं और स्वास्थ्य इंतजाम के हालात यह हैं कि कही डॉक्टर नहीं, तो कहीं केंद्रों पर ताले लटके हैं।
स्वास्थ्य केंद्रों पर लटके ताले जिले की सुविधाओं और महकमे के दावों की तस्वीर बयां करते हैं। कई दिनों तक केंद्र बंद होने के चलते मरीजों ने भी यहां का रुख करना बंद कर दिया है। जहां केंद्र खोले जाते हैं, वहां के हालात कुछ ऐसे हैं कि एक डॉक्टर पर 48 हजार लोगों की जिम्मेदारी है। ऐसे में संक्रामक रोगों या फिर अन्य किसी घटना में स्वास्थ्य सुविधाओं का मुंह ताकना बेमानी ही साबित होगा। संक्रामक रोगों के चलते जिले में मौतों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। दूसरी ओर, स्वास्थ्य विभाग दावा करता है कि प्रभावित क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं, लेकिन मिहींपुरवा और महसी में बंद पड़े स्वास्थ्य केंद्रों की इस तस्वीर से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में लोगों के इलाज को लेकर विभाग कितना संजीदा है। नवाबगंज, हुजूरपुर और शिवपुर विकासखंडों में भी केंद्र बंद हैं। जिले की 35 लाख की आबादी पर 11 सीएचसी, 10 प्राथमिक व 46 अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र स्थापित हैं, जिनमें 132 चिकित्सकों के सापेक्ष 72 डॉक्टर ही तैनात हैं। सिर्फ दो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ही महिला चिकित्सक की तैनाती है।
50 किलोमीटर का लगाते हैं चक्कर
विकासखंड मिहींपुरवा में मोतीपुर, सेमरीघटही, उर्रा, आंबा, सुजौली और लौकाही में स्वास्थ्य केंद्र स्थापित हैं, लेकिन डॉक्टर कहीं भी नहीं है। आंबा और सुजौली स्वास्थ्य केंद्र फार्मासिस्ट के भरोसे खुलता है, जबकि अन्य चार स्वास्थ्य केंद्र कई माह से बंद हैं, जिसके चलते इस क्षेत्र के लोगों को 50 किलोमीटर का चक्कर लगाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिहींपुरवा पहुंचते हैं, लेकिन यहां भी महिला डॉक्टर न होने से महिला रोगियों को 120 किलोमीटर दूर जिला महिला अस्पताल जाना पड़ता है।
जहां डॉक्टर नहीं, वहां फार्मेसिस्ट के सहारे अस्पताल
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. हरिप्रकाश स्वीकार करते हैं कि डॉक्टरों की कमी है। उनका कहना है कि जहां डॉक्टर नहीं है, वहां फार्मेसिस्ट के सहारे अस्पताल खोले जा रहे हैं। अगर स्वास्थ्य केंद्रों पर ताला लटक रहा है, तो कार्रवाई की जाएगी। सीएमओ का कहना है कि प्रतिमाह अपर मुख्य चिकित्साधिकारियों को निरीक्षण के निर्देश हैं। इस पर नजर भी रखी जाती है। मिहींपुरवा, महसी और उर्रा के बंद स्वास्थ्य केंद्रों के बारे में जब सीएमओ से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि अस्पतालों में ताला लटकने का पता चला है, जांच करवाई जाएगी।
सीएचसी पर संसाधनों का टोटा
जिले में पहले छह सीएचसी थे, लेकिन हाल ही में पांच का संचालन और शुरू किया गया है। इनमें मुस्तफाबाद, चरदा, चित्तौरा, हुजूरपुर और शिवपुर शामिल हैं, लेकिन इन सीएचसी पर भी दो या तीन डॉक्टरों के भरोसे ही जैसे तैसे औपचारिकता निभाई जा रही है। मानक के अनुरूप सीएचसी, पीएचसी को मिलाकर 126 पुरुष और 6 महिला डॉक्टर की जरूरत है, लेकिन जिले में इसके सापेक्ष सिर्फ 72 पुरुष और दो महिला चिकित्सक तैनात हैं।

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