जिंदगी पर भारी, तंत्र की खुमारी

Bahraich Updated Tue, 25 Sep 2012 12:00 PM IST
बहराइच। मौत की विनाशलीला जारी है और स्वास्थ्य महकमा मूक दर्शक बना हुआ है। तीन महीने में जिले में अब तक वायरल से 125 और डायरिया से 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बीते तीन सालों में जुलाई से सितंबर के बीच कुल 282 लोग अपना जीवन खो चुके हैं, लेकिन साल दर साल बढ़ते मौत के ग्राफ को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे।
जिले में मौतों की यह तस्वीर कोई नई बात नहीं, हर साल संक्रामक रोगों का कहर इसी तरह सभी गांवों पर टूटता है। रोगों की चपेट में आने से हर साल जुलाई से शुरू होता मौतों का सिलसिला नवंबर तक चलता है, लेकिन समस्या के समाधान के लिए कोई प्रयास नहीं किए जाते। इस साल बुखार से कुल 125 लोगों की मौत हुई। वर्ष 2011 में 72 और 2010 में 85 लोगों ने जिंदगी गंवाई। जनपद में करीब 35 लाख की आबादी पर छह सामुदायिक केंद्र, 57 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व 322 परिवार एवं मातृ शिशु कल्याण केंद्र स्थापित हैं। हालात यह हैं कि कई केंद्रों पर चिकित्सकों की तैनाती ही नहीं की गई है, जहां डॉक्टर तैनात हैं, वहां अधिकांश जगहों पर ताले लटके रहते हैं। विकासखंड मिहींपुरवा, महसी, कैसरगंज, जरवल, नवाबगंज क्षेत्रों में अक्सर स्वास्थ्य केंद्र बंद रहते हैं। दूसरी ओर, साफ-सफाई के हालात बयां करते हुए मिहींपुरवा विकासखंड के ग्राम उर्रा निवासी हरीराम गुप्ता और शैलेंद्र कहते हैं कि गांव में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। शिक्षक प्रमोद कुमार का कहना है कि स्वास्थ्य महकमा फॉगिंग के दावे करता है। अखबारों में खबर भी पढ़ते हैं, लेकिन आज तक फॉगिंग कैसे होती है, देखा ही नहीं है। भूपगंज निवासी अशोक मलानी गंदगी से आजिज हैं। उन्होंने कहा कि बाजार में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। सड़क पर जलभराव है। लोग संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं, लेकिन एंटी लार्वा का छिड़काव तो दूर सफाई तक नहीं हो रही है। पयागपुर निवासी मनोज अग्रवाल और एनके शुक्ला का कहना है कि स्वास्थ्य महकमा दावे ही कर रहा है। संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए कोई उपाय नहीं किए जा रहे।
जागरूकता आए तो रोगों पर लगेगा नियंत्रण
गांव में फैली गंदगी, मच्छर, दूषित पेयजल, जन-जागरूकता का अभाव आदि कारणों से तेजी से रोग पैर पसारता है। गांवों में नियमित स्वास्थ्य जागरूकता शिविर लगाकर, साफ-सफाई, रोगों से संबंधित जानकारियां दी जाएं, तो संक्रामक बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
डॉक्टरों की है कमी
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. हरिप्रकाश का कहना है कि जिले में डॉक्टरों की कमी है। सरकार ने संविदा चिकित्सकों को सीएचसी में तैनाती के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पखवाड़े भर में जिले को डॉक्टर मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर, जहां भी संक्रामक रोगाें की सूचना मिलती है, डॉक्टरों की टीम भेजी जाती है। नियंत्रण कक्ष मं दो टीमें सदैव भ्रमण पर रहती हैं। क्षेत्र में फॉगिंग का कार्य निरंतर चल रहा है।

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