खरखट्टनपुरवा में 350 परिवार बाढ़ में फंसे

Bahraich Updated Sun, 26 Aug 2012 12:00 PM IST
बहराइच। घाघरा का जलस्तर शनिवार दोपहर से फिर कम होने लगा है। इससे कटान तेज हो गई है। नईबस्ती अरनवा के 13 मकान नदी में समाहित हुए हैं। वहीं खरखट्टनपुरवा-अरनवा मार्ग आधे से अधिक नदी में समाहित हो गया है। जिसके चलते खरखट्टनपुरवा में लोगों के लिए रास्ता नहीं बचा है। गांव तीन ओर से नदी से घिर गया है। इससे गांव के 350 परिवार पानी में फंस गए हैं। लोग आशियाने उजाड़कर खेतों के रास्ते सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। अफरातफरी का माहौल है। राहत और बचाव के नाम पर अभी कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है।
घाघरा का जलस्तर कम जरूर हो रहा है, लेकिन अभी भी नदी एल्गिन ब्रिज पर खतरे के निशान से 39 सेंटीमीटर ऊपर है। पानी कम होने के बावजूद बाढ़ का संकट खत्म नहीं हुआ है। महसी और कैसरगंज तहसील के 101 गांव अभी भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। जिसके चलते जनजीवन अस्तव्यस्त है। नदी के जलस्तर में गिरावट के साथ ही कटान तेज हो गई है। अब नदी की लहरें अरनवा-नईबस्ती गांव के निकट कहर बरपा रही हैं। यहां नदी ने तेज कटान करते हुए दिनेश कुमार, माधवराम, सुखदराज सिंह, राकेश, धर्मादेवी, पदमसेन, झागरू, गंगू, रामकिशोर के मकान को समाहित कर लिया है। जबकि पचदेवरी निवासी रोहित और बरसाती के मकानों को भी नदी ने लील लिया है। लहरों ने खरखट्टनपुरवा डामर मार्ग का आधे से अधिक हिस्सा कटान करते हुए खत्म कर दिया है। जिसके चलते खरखट्टनपुरवा के लोगों का संपर्क क्षेत्र से टूटा हुआ है। ऐसे में ग्रामीणों के निकलने का रास्ता नहीं बचा है। गांव के लोग खेत के रास्ते अपने आशियाने तोड़कर ईंटों को ढो रहे हैं। हड़कंप की स्थिति है। कुछ लोग नाव से भी पलायन कर रहे हैं।
240 बीघा खेत नदी में समाहित
घाघरा महसी तहसील क्षेत्र में तेज कटान करते हुए छत्तरपुरवा और खरखट्टनपुरवा के निकट खेती योग्य जमीन को खत्म कर रही है। रात से अब तक नदी ने लगभग 240 बीघा खेती योग्य जमीन लील ली है। क्षेत्र निवासी रामधीरज, बड़कऊ, बाबू, धम्मन, रामसेवक, नकई आदि का कहना है कि दो दिन में इन सबकी खेती नदी की भेंट चढ़ चुकी है।
कटान पीड़ितों को दी जा रही सहायता
उपजिलाधिकारी घनश्याम त्रिपाठी का कहना है कि घाघरा नदी का जलस्तर घटने से लग रहा है कि दो तीन दिन में क्षेत्र के लोगों को बाढ़ के संकट से निजात मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के आशियाने कटे हैं, उन लोगों को चेकों का वितरण किया जा रहा है। राजस्वकर्मी और फ्लड पीएसी के जवान निरंतर राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।
लगाई गई हैं 55 नावें
अपर जिलाधिकारी यूएन सिंह ने बताया कि महसी और कैसरगंज के 101 मजरे बाढ़ की चपेट में हैं। इन गांवों में जो लोग फंसे हुए हैं, उन्हें निकालने के लिए 55 नावों को लगाया गया है। उन्होंने कहा कि शनिवार को 485 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। जबकि 525 लंच पैकेट का वितरण हुआ है। उन्होंने कहा कि दोनों तहसीलों के उपजिलाधिकारियों को निरंतर बाढ़ क्षेत्र में नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

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