घाघरा में समा गया अरनवा गांव

Bahraich Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
बहराइच। उफनाई घाघरा ने अरनवा गांव का अस्तित्व खत्म कर दिया है। शुक्रवार की दोपहर में 30 मिनट के अंदर 29 आशियाने नदी में समाहित हुए हैं, जबकि 24 घंटे में कुल 42 मकान घाघरा की भेंट चढ़े हैं। लगभग 245 बीघा खेती योग्य जमीन को भी नदी ने लील लिया है। हड़कंप की स्थिति है। अब नदी अरनवा नईबस्ती गांव की ओर बढ़ रही है।
महसी तहसील अंतर्गत अरनवा गांव 60 के दशक में बसा था। उस समय गांव घाघरा नदी से 8 किलोमीटर की दूरी पर थी लेकिन नदी कटान करते हुए वर्ष 2011 में गांव पर थपेड़े लेने लगी थी। इस गांव में 354 मकान थे। पिछले वर्ष 150 मकान नदी में समाहित हुए थे। इस वर्ष जुलाई से कटान कर रही घाघरा ने एक-एक कर 204 मकानों को अपने आगोश में ले लिया है। गांव के 29 मकान शुक्रवार की दोपहर 12.30 बजे से एक बजे के मध्य एक-एक कर नदी में समाहित हो गए। इनमें महरे, बड़ारू, कुलेराज, बाबू सिंह, विजय, राजकुमार, मुन्नी, प्रभा, भालू, छेदी, पंकज सिंह, चौधरी, आशाराम आदि के मकान शामिल हैं। इसके अलावा इसी गांव के 13 मकान गुरुवार रात से शुक्रवार सुबह तक नदी में समाहित हुए हैं। गांव का अस्तित्व खत्म हो गया है। अब नदी अरनवा नईबस्ती गांव की ओर बढ़ रही है। खेती योग्य जमीन पर भी नदी तेज कटान कर रही है। महसी तहसील क्षेत्र में छत्तरपुरवा, खरखट्टनपुरवा और अरनवा के निकट लगभग पौने दो सौ बीघा जमीन नदी ने लील ली है। जबकि कैसरगंज क्षेत्र के बहरइचीपुरवा, खासेपुरवा, ढपालीपुरवा और गोड़हिया गांव में भी लगभग 100 बीघा जमीन नदी में समाहित हुई है।

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