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संरक्षक ही बन बैठे हरियाली के भक्षक

Bahraich Updated Tue, 05 Jun 2012 12:00 PM IST
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बहराइच। पर्यावरण संरक्षण के मामले में जिले की हालत चिंताजनक है। कटते पेड़ और नदियों में समाती कल कारखानों का गंदगी से पर्यावरण संतुलन बढ़ता जा रहा है। जिले में वर्ष भर में 2500 पेड़ों पर आरा चल चुका है। यहीं नहीं, पर्यावरण सुरक्षा की शपथ लेने वाले ही इसका क्षरण कर रहे हैं। कटान में वनकर्मियों की संलिप्तता उजागर हुई है। इसके सापेक्ष वन विभाग लगभग 7 लाख से अधिक पौधे रोपित करने का दावा कर रहा है। लेकिन जो पौध रोपित किए गए, उनमें से अधिकाश नष्ट हो चुके हैं। टूटे ट्री-गार्ड वन विभाग के दावों को मुंह चिढ़ा रहे हैं।
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आज पर्यावरण दिवस है। इस दिन हर बार गोष्ठियां और परिचर्चाएं होती हैं। लोग पर्यावरण सुरक्षा का संकल्प लेते हैं लेकिन फिर भी स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। कतर्नियाघाट वन क्षेत्र नेपाल सीमा से सटा हुआ है। बहराइच वन प्रभाग का भी एक बड़ा क्षेत्रफल नेपाल सीमा को छूता है। दुर्लभ वन्यजीव भी विहार करते हैं लेकिन जंगल की इस हरियाली को वन माफिया के साथ रक्षकों की भी नजर लगी हुई है। जिन पर सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वही हरियाली पर आरा चलवा रहे हैं। वर्ष 2011 में कतर्नियाघाट रेंज के एसडीओ समेत तीन कर्मचारियों पर कटान के मामले में उंगलियां उठी थी। मुकदमे भी दर्ज हुए थे। माह भर पूर्व बहराइच वन प्रभाग के डीएफओ डॉ. रामखेलावन सिंह अवैध कटान के मामले में निलंबित हुए हैं। दोनों वन प्रभागों में अब तक लगभग 2500 पेड़ों पर आरा चल चुका है। अब बात करते हैं नदी और नालों की। शहर से सटकर बहने वाली सरयू नदी की मुख्य शाखा में शहर के नालों का गंदा पानी गिरता है, जिससे यह नदी लगभग सूख चुकी है। अब तक नदी को सहेजने के कोई कदम नहीं उठाए गए हैं।
इन मामलों में अवैध कटान की जद में आए रक्षक :-
20 मई 2012 - बहराइच वन प्रभाग के कैसरगंज रेंज में 400 अर्जुन के पेड़ों की कटान मामले में डीएफओ निलंबित।
27 फरवरी 2012 - बहराइच वन प्रभाग के बहराइच रेंज अंतर्गत ईंट भठ्ठे से 57 बोटा लकड़ियां बरामद। वन निगम ईकाई अधिकारी समेत तीन के खिलाफ रेंज केस दर्ज।
26 मई 2011 - कतर्निया घाट सेंचुरी क्षेत्र से काटी गई एक ट्रक लकड़ी सीतापुर में बरामद। एसडीओ, ककरहा रेंज के वन दरोगा समेत 7 के खिलाफ सीतापुर में रिपोर्ट दर्ज।
24 दिसंबर 2010 - ककरहा के नौबना बीट में कटे 450 पेड़ के मामले में डिप्टी रेंजर सूर्यभूषण द्विवेदी, वन दरोगा मुन्नालाल, वन रक्षक रामकुमार, बीट वाचर सुंदरलाल, मुरली व रईश के खिलाफ रेंज केस दर्ज।
02 मई 2010 - मोतीपुर रेंज में काटी गई लकड़ी के मामले में एसडीओ अवध बिहारी, उदयबख्श सिंह समेत 6 के खिलाफ रेंज केस दर्ज।
अक्तूबर 2010 - ककरहा रेंज में लखीमपुर की सीमा से सटे सेंचुरी क्षेत्र में सेमल के 100 पेड़ कटे। आधा दर्जन वन कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई।

खुले में फेंका जा रहा कूड़ा
शहर की चार लाख की आबादी से प्रतिदिन निकलने वाले कूड़े कचरे के निस्तारण की व्यवस्था नहीं है। झिंगहा घाट पुल के निकट कूड़ा खुले में फेंका जा रहा है, जो संक्रामक रोगों का संवाहक बना है। नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी लालचंद भारती ने बताया कि कचरा निस्तारण के लिए तीन एकड़ जमीन की जरूरत है। वर्ष 2010 में बाईपास मार्ग पर जमीन को चिह्नित कर प्रस्ताव शासन को भेजा गया था लेकिन अब तक प्रस्ताव फाइलों में ही दबा पड़ा है। उन्होंने कहा कि पुन: इस मामले में पत्र लिखा जाएगा।

मेडिकल कचरे के निस्तारण की भी व्यवस्था नहीं
मेडिकल कचरे के निस्तारण की भी कोई व्यवस्था नहीं है। नर्सिंग होम और अस्पताल के बाहर आए दिन मेडिकल कचरे का ढेर नजर आता है। जिले के किसी भी अस्पताल में इंसीनेटर नहीं है, जिसके चलते मेडिकल कचरा भी पर्यावरण के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. हरिप्रकाश का कहना है कि मेडिकल कचरा निस्तारण के लिए प्रति सप्ताह फैजाबाद से गाड़ी आती है। उसी गाड़ी से कचरा भेजा जाता है।

2011-12 में पौधरोपण अभियान एक नजर में-
वर्ष 2011-12 में वन विभाग की ओर से 6 लाख 17 हजार 96 पौध कैसरगंज, नानपारा, चरदा, महसी, रुपईडीहा रेंजों में लगवाए गए। इसके अलावा ग्राम्य विकास विभाग की ओर से एक लाख 18 हजार 994, औद्योगिक विकास विभाग की ओर से 9100, सिंचाई विभाग की ओर से 2315, पीडब्ल्यूडी की ओर से 2315, सहकारिता विभाग की ओर से 643 व भूमि एवं जल संरक्षण विभाग की ओर से 2900 पौध रोपित करवाए गए। वन क्षेत्राधिकारी गोपाल ओझा ने बताया कि वर्ष 2010-11 में जिले का वन क्षेत्रफल लगभग 11 हजार हेक्टेयर था जो अब बढ़कर 12 हजार हेक्टेयर हो गया है।

जागरूकता से ही होगा समस्या का समाधान
कतर्नियाघाट फ्रेंडस क्लब के अध्यक्ष भगवानदास लखमानी का कहना है कि नगरीय क्षेत्रों में सार्वजनिक स्थानों पर चलने वाले जनरेटर व कारखाने पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख कारक हैं। पेड़ों की कटान न की जाए। नदियों की सुरक्षा के लिए भी गंदा पानी इस पर ध्यान दिया जाये। उन्होंने कहा कि क्लब की ओर से प्रतिवर्ष जागरूकता अभियान चलाया जाता है लेकिन जिला प्रशासन का सहयोग नहीं मिल पा रहा है।
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