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प्रवासी पक्षियों के कलरव से गूंज रहे जलाशय

Lucknow Bureau Updated Sat, 10 Nov 2018 10:33 PM IST
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कतर्नियाघाट (बहराइच)। तराई में ठंड बढ़ने के साथ ही साइबेरियन मेहमानों का आना शुरू हो गया है। नदी और सरोवर में साइबेरियन पक्षी पहुंचने लगे हैं। मेहमान पक्षियों के कलरव से नदी, सरोवर और झीलों के तट गूंज रहे हैं। ये प्रवासी मेहमान जिले के जलाशयों में मार्च तक प्रवास करने के बाद अप्रैल में अपने देश लौट जाएंगे।
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तराई की आबोहवा साइबेरियन मेहमानों के लिए काफी मुफीद मानी जाती है। ठंड की शुरुआत के साथ ही साइबेरियन मेहमान तराई में आना शुरू हो जाते हैं। नवंबर के मध्य से साइबेरियन मेहमानों से हिमालय की तलहटी में बसे तराई के नदी व सरोवरों की रौनक बढ़ जाती है।

इस बार तराई में ठंड के थोड़ा पहले दस्तक देने से सप्ताह भर पूर्व ही साइबेरियन पक्षियों की आमद हो गई है। नवंबर से मार्च तक साइबेरियन पक्षी यहां प्रवास करते हैं। सबसे अधिक साइबेरियन पक्षी कतर्नियाघाट से होकर बहने वाली नदियों, नहरों व जंगल के निकट स्थित झीलों में दिखाई देते हैं।

गर्मी की शुरुआत साथ ही ये पुन: हिमालय पार कर अपने वतन लौट जाते हैं। साइबेरियन पक्षियों के चार महीने का यह प्रवास काल तराई के मौसम को काफी खुशनुमा बनाता है। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के प्रभागीय वनाधिकारी जीपी सिंह ने बताया कि कतर्नियाघाट रेंज के कतर्नियाघाट मैलाताल झील व कोठियाघाट में साइबेरियन पक्षियों की आमद हुई है।

कतर्निया के प्रवास स्थल
कतर्नियाघाट के सेंट्रल स्टेट फार्म, लठौवा-कठौवा ताल झील, माहादेवा ताल झील, धर्मापुर झील, गायघाट स्थित सरयू तट, मजरा डैम, गिरिजापुरी बैराज, गेरुआ नदी के कतर्नियाघाट व कोठियाघाट, चित्तौरा झील, पयागपुर का बघैल ताल झील।
हिमालय पार कर आती हैं 25 प्रजातियां
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी दबीर हसन ने बताया कि साइबेरियन देशों के अलावा चीन व अन्य ठंडे देशों से 25 प्रजातियों के पक्षी भारतीय क्षेत्रो में प्रवास के लिए प्रति वर्ष आते हैं। इनमें सुरखाब, पिनटेन, फिशलिंग टिल्स, लालसर, नीलसर, ब्राह्मीडक, कामनकूट, ब्लैकडक पक्षी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र होते हैं।

सुरक्षा के लिए अलर्ट किए गए रेंज अधिकारी
प्रवास पर आने वाले साइबेरियन पक्षियों पर शिकारियों की भी नजर होती है। डीएफओ जीपी सिंह ने बताया कि कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में स्थित तालाब, झील व नदियों में प्रवास करने वाले पक्षियों की सुरक्षा के लिए सभी रेंजों के वन क्षेत्राधिकारी को अलर्ट किया गया है। वन दरोगा व वन रक्षक नियमित गश्त कर रहे हैं।

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