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श्रद्धालु मायूस होकर लौटे, कुछ ने रेत में स्नान कर विरोध जताया

अमर उजाला / ब्यूरो/ बागपत Updated Mon, 05 Jun 2017 01:41 AM IST
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बागपत । जेठ के दशहरे पर रविवार को सूखी यमुना को देखकर श्रद्धालु मायूस हुए। पानी की एक बूंद नहीं थी। काफी संख्या में लोग यमुना पर पहुंचे जरूर, उदास होकर लौट गए।  किसी ने तपते रेत से स्नान कर प्रशासन के प्रति भड़ास निकाली, तो किसी ने हैंडपंप से नहाकर दशहरे का पर्व मनाया। 
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जिले भर में दशहरे का पर्व धूमधाम के साथ मनाया। जगह-जगह भंडारे और मीठे जल की प्याऊ लगाई गई। सैकड़ों लोग हरिद्वार में गंगा स्नान करने के लिए सुबह ही रवाना हुए। यमुना पर आसपास के गांवों से सैकड़ों श्रद्धालु आस्था के साथ स्नान करने के लिए पहुंचे, लेकिन चारों ओर रेत ही रेत देखकर मायूस होकर लौट गए।  कुछ श्रद्धालुओं ने यमुना पर लगे हैंडपंप पर स्नान कर दशहरे का पर्व बनाकर इतिश्री की। प्रसाद अर्पित कर प्रार्थना की। प्रशासन के प्रति अपनी भड़ास निकालते हुए विरोध स्वरूप कर्मबीर, सोनू और                रोहित ने तपती रेत से स्नान किया। प्रशासन के अफसरों को कोसा। 


उन्होंने कहा यमुना आज अफसरों की लापरवाही और नेताओं की उपेक्षा का शिकार है। विधानसभा से लेकर लोकसभा तक में ठेस पैरवी नहीं की जाती है। जिस कारण यमुना में पानी नहीं छोड़ा जा रहा हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने कहा यमुना लाखों लोगों के आस्था केंद्र है, जो प्रशासन की उपेक्षा का शिकार हो चुकी है। यमुना को केवल व्यापार का जरिया बनाकर रखा दिया है, श्रद्धा और आस्था का कोई महत्व नहीं है। उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार से यमुना में जल प्रवाह कराने की मांग की।
लोगों के सर पर यमुना के प्रति इतनी आस्था नजर आई की किनारे पर बने गड्ढे में रुके हुए पानी की काफी दूर तक तलाश की, लेकिन मायूस हुए। भीषण गर्मी में यमुना कुंड पूरा सूख चुका है।

दूसरी तरफ ज्योतिषाचार्य राज कुमार शास्त्री ने बताया गंगा दशहरा के दिन ही मां गंगा ब्रह्मा जी के कमंडल से निकालकर पृथ्वी पर अवतरित हुई थी। तभी से गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है।  दशहरे के दिन अगर कोई मनुष्य मां गंगा के जल में  स्नान करता है तो उसे मोक्ष और पूजन, दान करने पर पुण्य की प्राप्ति होती है और मनुष्य के अनेकों पाप से मुक्ति मिलती है। गंगा दशहरा के दिन जो भी वस्तु दान में दिया जाता है उसकी संख्या दश होनी चाहिए।

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